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बड़ी खबर - गो हत्या बंदी पर हुए एकजुट : ज्योतिर्मठ की ललकार को पूरी पीठ का समर्थन,तो क्या कुरुक्षेत्र में रण होगा या फिर गिर रही गो रक्त की बूंदे थम जाएंगी

  • गोमाता के सम्मान के लिए दिखने लगी हिंदुओं की एकजुटता।

  • कुरुक्षेत्र की धरती अब रक्तपात नहीं गो माता का सम्मान चाहती है।

  • राम कृष्ण की धरती पर गायें तड़पे-विलखें यह ठीक नहीं।

  • चतुरंगिणी सेना और सरकारी सेना क्या होंगी आमने सामने ?

वाराणसी- वैदिक आर्य हिंदुओं की आवाज को हमेशा संत सन्यासियों व पूर्वाचार्यों ने सुर दिया और मजबूती के साथ रक्षार्थ गर्जना करते रहे। आज वही सुर फिर से गूंज रहे हैं। गो हत्या लगातार बढ़ती जा रही है जो कि हर हिंदुओं के माथे पर लगा कलंक है। इसी कलंक को मिटाने के लिए धर्माचार्यों ने हुंकार भरी है।

सनातन के सर्वोच्च धर्माचार्य शंकराचार्य होते हैं जो कि पूरे भारत में चार ही पीठ स्थापित हैं। कुल मिलाकर चार पीठ के चार शंकराचार्य। उनमें से दो पीठ के शंकराचार्य इस वक्त काफी मुखर हैं ।

पूरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी श्री निश्चलानंद सरस्वती जी महाभाग और ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य पूज्य श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाभाग। कहीं न कहीं मत में एकता कई मुद्दों पर देखी गई भले ही वैचारिक भिन्नता कभी रही होगी। आज दोनों पीठ के शंकराचार्य एक दूसरे की आवाज बने हुए हैं।

गो माता को राष्ट्र माता बनाने के लिए जितना प्रयास स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कर रहे हैं तो उतनी ही तेजी से स्वामी निश्चलानंद जी महाराज जी भी मंचों से गर्जना कर रहे हैं। स्वामी निश्चलानंद जी महाराज पूरी पीठ के शंकराचार्य हैं जो कि राष्ट्रोत्कर्ष अभियान को गति दे रहे हैं और गो माता की हत्या बंदी को लेकर सरकारों को आड़े हाथों लेते हैं। तो वहीं ज्योतिर्मठ वाले शंकराचार्य ने तो यूपी में धर्मयुद्ध का शंखनाद कर चतुरंगिणी सेना का गठन कर डाला है। बताया जा रहा है कि गो गंगा व हिंदुओं की रक्षा के लिए अब रण होगा। लोग यह कहने लगे हैं कि क्या अब सरकारी सेना और हिंदुओं की रक्षा के लिए बनी चतुरंगिणी सेना आमने सामने होगी। भविष्य के गर्भ में कई ऐसे सवाल पल रहे हैं जिनका उत्तर समय ही बता पायेगा।

लोगों के विश्लेषण व चर्चाओं के अनुसार, कुरुक्षेत्र में दो सेनाएं आमने सामने होंगी जिसमें एक तरफ सरकार और दूसरी तरफ सच्चे गो भक्त व हिन्दू सेना। सरकार के लिए यह मुश्किल घड़ी है और नकली असली हिंदुओं के पहचान का समय भी। उत्तर और पूर्व दिशा से भरी जा रही हुंकार का नाद पश्चिम व दक्षिण की तरफ भी सुनाई दे रहा है। उधर से भी समर्थन के स्वर गूंज रहे हैं। मतलब अब चारों पीठ के शंकराचार्य महाभागों ने गो माता की रक्षार्थ व प्रतिष्ठार्थ युद्ध के समर्थन में जुट गए हैं। देखना यह होगा कि हिन्दू राष्ट्र की मांग करने वालों के लिए गो माता की सुरक्षा व सम्मान कितना मायने रखता है। और संत सरकारी प्रभाव में झुके रहेंगे या फिर अपने पारंपरिक पीठ के संरक्षण को महत्ता देकर उनकी आज्ञा को शिरोधार्य करेंगे। कुल मिलाकर कुरुक्षेत्र की धरती गो माता का सम्मान चाहती है रक्तपात नहीं।

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