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गो माता के रोम रोम में है ईश्वर का वास

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Editorial- संतो के श्राप से कांपती सत्ता : गो माता के रोम रोम में है ईश्वर का वास

Editor

Sat, May 9, 2026

संपादकीय- गो सम्मान आज की आवशकता है।

साधु संतों का श्राप ग्रहण बनकर कर देता है सर्वनाश!

गो रक्षा के संकल्प रथ को हल्के में न ले सरकार और अन्य राजनीतिक पार्टियां ! सन्यासी के दिल से जब आह निकली है तो पीड़ा पहुचाने वाले का सर्वनाश हो जाता है। ऐसे कई उदाहरण व कारण इतिहासों में दर्ज हैं। पौराणिक कथाओं में भी आशीर्वाद का फल और श्राप से पतन के अध्याय भरे पड़े हैं।

पौराणिक कथाओं को भी यदि हम कुछ देर के लिए अलग कर दें,तब भी 19 के दशक में भी एक ऐसा ही श्राप बहुत चर्चित हुआ और वह है गो माता के लिए समर्पित गो भक्तों पर गोलियां चलवाने के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को मिला श्राप ।

श्राप दिया था धर्मसम्राट करपात्री जी महराज ने,कारण बना था साधु संतों पर सत्ता द्वारा किया गया क्रूर प्रहार,जिसमें कई सन्तो की जान चली गई थी। लड़ाई लड़ रहे थे गो माता की रक्षा व सम्मान की। तिथि अश्विन कृष्ण नवमी ,गोपाष्टमी के बाद कि तिथि अंग्रेजी तारीख थी 7 नवम्बर 1966 । उसके बाद वह तिथि काल बन गई गांधी परिवार के लिए अब न तो सत्ता है और न ही वह लोग,सब जड़ से उजड़ गए।

प्रायश्चित ! ही बन सकता है क्षमादान का कारण और सत्ता के वापसी का जरिया भी। एक संत के श्राप से एक संत का आशीर्वाद ही लड़ सकता है और आदर भाव से उस असर को कम कर कल्याण की भावना को सुदृढ कर सकता है।

राहुल गांधी के लिए यह क्षमादान का मौका है। उस समय करपात्री जी महाराज गौ रक्षा अभियान चलाए थे और वर्तमान में उनके ही अत्यंत सेवक-शिष्य ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज आगे बढ़ा रहे हैं।

जो भी सत्ता की सीढ़ी चढ़ना चाहता है उसे सन्तो के आशीर्वाद से गुजरना पड़ेगा।

अखिलेश यादव सरकार ने भी इस श्राप का दंश झेल चुके हैं और लगता है कि वही गलती यूपी की वर्तमान सरकार कर रही है। गोवंशों के बध का रक्त किसी को माफ नही करता इसका ख्याल सत्ताधीशों को हमेशा होना चाहिए। सत्ता की मदान्धता गो माता के गिरते रक्त की बूंदों की पहचान बन गई है। यह सिर्फ सत्ता ही नहीं बल्कि जनता को भी अपने श्राप के आगोश में निगल रही है।

धर्म की शुद्धता में जब राजनीति की मिलावट होने लगती है तब धर्म पाखंड बन जाता है। उस स्थिति से अखाड़ों व साधु संतों को बचना होगा। शुद्धता में मिलावट कर उसकी तासीर को मद्दा होने से बचाना होगा।

वर्तमान में ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने जो मुद्दा गो रक्षा व सम्मान का लेकर चल रहे हैं वह पूरे राष्ट्र के हित का है। जन जन की रक्षा का है और उनके समृद्धि का है। क्योंकि गो माता ही हमारे जीवन की पोषक आधार हैं। बिना गाय के आशीर्वाद देश की कोई भी समस्या का अंत होना संभव नहीं.

उत्तरप्रदेश में हो रही गविष्ठि यात्रा बहुत ही महत्वपूर्ण है। इस यात्रा को सिर्फ धर्म जागरण से ही जोड़कर देखना चाहिए। यह किसी पार्टी के हित व नुकसान के लिए नहीं बल्कि देश में विशुद्ध रूप से सनातनी स्वावलंबन आधार शिला को मजबूत रखने की सत्ता निर्माण की यात्रा हो सकती है। क्योंकि लोकतांत्रिक देश में बिना जनमत के जब कुछ हासिल नही होता तो फिर गुरुओं को इसके लिए भी सोचना अवश्यंभावी हो जाता है।

गो मतदाता जागरण का यह भी एक माध्यम होना चाहिए। जब तक गो माता किसी पार्टी की विशेष आवाज नहीं बनेगी जब तक देश में इसका माहौल नही बनेगा तब तक राजसत्ता हासिल करने वाले लोग गो हत्या बंदी के लिए मजबूर नही होंगे। इसलिए पूज्य शंकराचार्य जी के गविष्टि यात्रा का उद्देश्य गो मतदाता जागरूकता भी होना अवश्यंभावी हो जाता है। इस अभियान में इस यात्रा में हर सनातनी को आगे आना ही होगा,तभी हमारा धार्मिक सनातनी भविष्य सुरक्षित रह सकता है। क्योंकि हिन्दू धर्म में गो माता को मूल आस्था का केन्द्र माना जाता है। जब सनातन की आत्मा का पूजन नही होगा,सम्मान नही होगा तो धर्म का क्या होगा। पहले गौ माता को राष्ट्र माता घोषित कर हिंदुत्व को सुदृढ करना होगा तभी हिन्दू राष्ट्र की ओर उन्मुख होना चाहिए। अन्यथा, हिन्दू राष्ट्र की कोरी कल्पना करना ठीक नही।

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