: प्रयागराज में एक अनोखा मन्दिर जहाँ लगती है शिव की अदालत,भक्त कान पकड़कर करते हैं उठक बैठक,मांगते हैं माफी.
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Wed, Jul 27, 2022प्रयागराज - आस्था की नगरी प्रयागराज में संगम के साथ ही एक अनोखा मन्दिर भी है जहां शिव की अदालत भी लगती है। यहां एक अनोखा मन्दिर है जहां शिव भक्त बाबा भोलेनाथ के समक्ष अपने कर्मों की गलती की माफी मांगते हैं। यहां भोलेनाथ की कचहरी लगती है जहां भक्तगण फरियादी के रूप में कान पकड़कर उठक बैठक कर मांफी मांगते हैं।
यहां एक दो नहीं बल्कि 288 शिवलिंग स्थापित हैं। इस अनोखे मन्दिर में भगवान भोलेनाथ जज व वकील के रूप में स्थापित हैं। यहां भक्त फरियादी बनकर माफी मांगने आते हैं। इस मंदिर को शिव कचहरी के नाम से जाना जाता है।
प्रयागराज के शिवकुटी मुहल्ले में यह मंदिर स्थापित है। इस मंदिर की स्थापना सन 1865 में राणा जनरल जंग पदम् बहादुर ने की थी। इस मंदिर में भगवान शिव का एक बड़ा शिवलिंग है जिसे भक्त जज के रूप में देखते हैं । इसी शिवलिंग के समक्ष भक्त फरियादी की तरह उनके कान में कुछ बोलते हैं और अपना कान पकड़कर उठक बैठक करते हैं और अपने कर्मों व गलतियों की माफी मांगते हैं। कहा जाता है कि जब जाने अनजाने में की गई गलती की मांफी मांग ली जाती है तब भोलेनाथ उनके द्वारा किये गए पुण्य कर्मों का फल देने लगते हैं। यहां हर जगह छोटे बड़े शिवलिंग ही नजर आते हैं। 288 शिवलिंगों की स्थापना का यह मंदिर एकलौता और अनोखा है। सावन माह में यहां भक्तों का तांता लगा रहता है।
यहां एक दो नहीं बल्कि 288 शिवलिंग स्थापित हैं। इस अनोखे मन्दिर में भगवान भोलेनाथ जज व वकील के रूप में स्थापित हैं। यहां भक्त फरियादी बनकर माफी मांगने आते हैं। इस मंदिर को शिव कचहरी के नाम से जाना जाता है।
प्रयागराज के शिवकुटी मुहल्ले में यह मंदिर स्थापित है। इस मंदिर की स्थापना सन 1865 में राणा जनरल जंग पदम् बहादुर ने की थी। इस मंदिर में भगवान शिव का एक बड़ा शिवलिंग है जिसे भक्त जज के रूप में देखते हैं । इसी शिवलिंग के समक्ष भक्त फरियादी की तरह उनके कान में कुछ बोलते हैं और अपना कान पकड़कर उठक बैठक करते हैं और अपने कर्मों व गलतियों की माफी मांगते हैं। कहा जाता है कि जब जाने अनजाने में की गई गलती की मांफी मांग ली जाती है तब भोलेनाथ उनके द्वारा किये गए पुण्य कर्मों का फल देने लगते हैं। यहां हर जगह छोटे बड़े शिवलिंग ही नजर आते हैं। 288 शिवलिंगों की स्थापना का यह मंदिर एकलौता और अनोखा है। सावन माह में यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। विज्ञापन
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