: कलयुग में भगवत संकीर्तन नाम ही सभी कष्टों से मुक्ति का साधन है-आचार्य दुर्गेश शर्मा
सप्तम दिवस की कथा में गंगा,तुलसी,कलयुग का भावी चित्रण व भारतवर्ष की महिमा का हुआ व्याख्यान-
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भावताचार्य पंडित श्री दुर्गेश शर्मा जी[/caption]
अयोध्या- गोवर्धनपुर में चल रही देवी भागवत कथा में भागवताचार्य पंडित दुर्गेश शर्मा ने बताया कि, गंगा लोककल्याण हेतु धरती पर आईं और धरती में बढ़ रहे पाप को कम करने तथा मुक्ति प्रदान करने हेतु धरती पर अवतरित हुईं.कथा के दौरान उन्होंने कहा कि तुलसी को गणेश जी पर नही चढ़ाना चाहिए लेकिन बिना तुलसी ठाकुर जी का भोग भी नही लगाना चाहिए.उन्होंने कहा कि वेद में वर्णित बातों को अपने जीवन मे उतारना चाहिए.किसी भी अवस्था मे नग्न होकर नदियों में स्नान करना वर्जित है जो व्यक्ति ऐसा करता है उसे लौकिक और पारलौकिक रूप से दोष लगता है.ग्रहण के दौरान भोजन और कार्य वर्जित है,उस दौरान गुरुमंत्र का व इष्टदेव का जाप करने से अनन्तगुना फल प्राप्त होता है.ग्रहण काल मे सोना,भोजन करना मना है.तप,दान और भगवत भजन का अनंत गुना फल प्राप्त होता है.सनातन धर्म का बखान करते हुए कथाव्यास ने कहा कि,सनातन ही एक ऐसा धर्म है जो कि मानवीय संवेदना और जीवन के आदर्श को बताता है सनातनी खभी भी ऐसा कार्य नही करता जो कि राष्ट्र धर्म से विलग हो.
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हवन करते हुए यजमान बृजमोहन उपाध्याय व सीए मदन मोहन उपाध्याय (सपत्नीक).[/caption]
गंगा का उद्गम लोक कल्याण के लिए हुआ है-
गोवर्धनपुर में माता सिद्धेश्वरी मन्दिर प्रांगण में चल रही श्री देवी भागवत कथा का सप्तम दिवस की कथा का वाचन हुआ. इस दौरान गंगा अवतरण की कथा सुनाते हुए भागवत भ्रमर कथाव्यास दुर्गेश शर्मा ने माँ गंगा का महत्व बताते हुए कहा कि,वामन पुराण के अनुसार जब भगवान विष्णु ने वामन रूप में अपना एक पैर आकाश की ओर उठाया तो तब ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु के चरण धोकर जल को अपने कमंडल में भर लिया। इस जल के तेज से ब्रह्मा जी के कमंडल में गंगा का जन्म हुआ। ब्रह्मा जी ने गंगा हिमालय को सौंप दिया इस तरह देवी पार्वती और गंगा दोनों बहन हुई। उन्होंने आगे बताया कि तुलसी हमारे जीवन मे अनेक दुखों को दूर करती हैं.आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तुलसी महत्वपूर्ण हैं.उन्होंने कहा कि
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी के पौधे में धन की देवी मां लक्ष्मी का वास होता है। ऐसी मान्यता है कि प्रतिदिन तुलसी की पूजा करने के घर में समृद्धि आती है और आर्थिक परेशानियां कम हो जाता है। तुलसी के पौधे को बहुत ही पवित्र माना गया है, इसे घर के आंगन में भी लगाने का फल बताया गया है.
भारत भूमि जैसी कोई भूमि नही,शक्ति का प्रादुर्भाव इसी राष्ट्र में हुआ है-
भारत वर्ष अपने आप मे तीर्थ है,सनातन संस्कृति सबसे ज्यादा सत्य व चरित्रवान है-
भारतवर्ष अपने आप में तीर्थ है जिस तरह तीर्थस्थानों की परिक्रमा से नई ऊर्जा मिलती है उसी तरह भारतवर्ष की परिक्रमा से भी नई ऊर्जा मिलती है । ये स्वयं प्रमाणित है । आप यहाँ पर किसी से भी भाग्य, भगवान, आत्मा, परमात्मा के बारे में बातें करके देख सकते हैं सभी के पास कुछ-न-कुछ अपने विचार होते हैं और वे विचार हमारे किसी-न-किसी शास्त्र में वर्णित होते हैं । हलाँकि वे उन शास्त्रों से हो सकता है अवगत नही हों । इसलिये यहाँ पर मनुष्य ही नहीं देवता भी जन्म लेकर यज्ञ यागादि अच्छे कर्मों के द्वारा पुण्य अर्जित कर अच्छे लोकों में जाना चाहते हैं । हमारे सनातन धर्म में ही भगवान के अवतार लेने की बात है । अन्य धर्मों मे नहीं क्योंकि सनातन धर्म भारतवर्ष में ही प्रचलित है और यह भारतवर्ष योगभूमि है । अतः यहाँ पर नये कर्म किये जा सकते है और अन्य खण्डों में नये कर्म नहीं हो सकते है - केवल पुरातन कर्मों का भोग ही हो सकता है । अतः देवगण भी यही गान करते हैं - विष्णुपुराण में कहा गया है कि,
गायन्ति देवाः किल गीतकानि
धन्यास्ते तु भारतभूमि भागे।
स्वर्गापवर्गास्पदमार्गभूते
।भवन्ति भूयः पुरुषाः सुरत्वात् ।।
अर्थात् जिन्होंने स्वर्ग और अपवर्ग के मार्गभूत भारतवर्ष में जन्म लिया है, वे पुरुष हम देवताओं की अपेक्षा भी अधिक धन्य हैं । सनातन धर्म का महत्व और चरित्र का गुणगान करते हुए पंडित दुर्गेश शर्मा ने कहा कि,
हिंदू संसार में सबसे अधिक राष्ट्र प्रेमी और राष्ट्रभक्त लोग हैं।ऐसी उत्कृष्ट और गहरी और व्यापक राष्ट्रभक्ति संसार में लगभग कहीं भी नहीं है क्योंकि इतना प्राचीन और स्वाभाविक राष्ट्र विश्व में और कोई नहीं हैं ।
कथा का आयोजन गोवर्धन फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित किया गया है.कलयुग के बारे में बात करते हुए कथाव्यास ने कहा कि इस युग मे भगवान की भक्ति,पूजन और गंगा का स्नान मुक्ति का कारण हैं इसलिए इस युग मे सच्चा कर्म करते हुए भगवत नाम का संकीर्तन ही संकटमोचक है. बता दें कि,प्रतिदिन योग की शिक्षा व प्रशिक्षण कराकर लोगों को आरोग्यता की विधि बताई जा रही है.हवन पूजन के बाद कथा का आरंभ अपराह्न 3 बजे से होती है.
कथा के दौरान प्रमुख रूप से यजमान बने गोवर्धन फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बृजमोहन उपाध्याय,तुलसीराम उपाध्याय ,जगराम उपाध्याय,मिशन सनातन के अध्यक्ष सीए मदन मोहन उपाध्याय,बृजेश उपाध्याय, बीसएफ के लेफ्टिनेंट मनीष सिन्हा सहित सैकड़ों श्रद्धालु व श्रोतागण उपस्थित रहे.
भावताचार्य पंडित श्री दुर्गेश शर्मा जी[/caption]
अयोध्या- गोवर्धनपुर में चल रही देवी भागवत कथा में भागवताचार्य पंडित दुर्गेश शर्मा ने बताया कि, गंगा लोककल्याण हेतु धरती पर आईं और धरती में बढ़ रहे पाप को कम करने तथा मुक्ति प्रदान करने हेतु धरती पर अवतरित हुईं.कथा के दौरान उन्होंने कहा कि तुलसी को गणेश जी पर नही चढ़ाना चाहिए लेकिन बिना तुलसी ठाकुर जी का भोग भी नही लगाना चाहिए.उन्होंने कहा कि वेद में वर्णित बातों को अपने जीवन मे उतारना चाहिए.किसी भी अवस्था मे नग्न होकर नदियों में स्नान करना वर्जित है जो व्यक्ति ऐसा करता है उसे लौकिक और पारलौकिक रूप से दोष लगता है.ग्रहण के दौरान भोजन और कार्य वर्जित है,उस दौरान गुरुमंत्र का व इष्टदेव का जाप करने से अनन्तगुना फल प्राप्त होता है.ग्रहण काल मे सोना,भोजन करना मना है.तप,दान और भगवत भजन का अनंत गुना फल प्राप्त होता है.सनातन धर्म का बखान करते हुए कथाव्यास ने कहा कि,सनातन ही एक ऐसा धर्म है जो कि मानवीय संवेदना और जीवन के आदर्श को बताता है सनातनी खभी भी ऐसा कार्य नही करता जो कि राष्ट्र धर्म से विलग हो.
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हवन करते हुए यजमान बृजमोहन उपाध्याय व सीए मदन मोहन उपाध्याय (सपत्नीक).[/caption]
गंगा का उद्गम लोक कल्याण के लिए हुआ है-
गोवर्धनपुर में माता सिद्धेश्वरी मन्दिर प्रांगण में चल रही श्री देवी भागवत कथा का सप्तम दिवस की कथा का वाचन हुआ. इस दौरान गंगा अवतरण की कथा सुनाते हुए भागवत भ्रमर कथाव्यास दुर्गेश शर्मा ने माँ गंगा का महत्व बताते हुए कहा कि,वामन पुराण के अनुसार जब भगवान विष्णु ने वामन रूप में अपना एक पैर आकाश की ओर उठाया तो तब ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु के चरण धोकर जल को अपने कमंडल में भर लिया। इस जल के तेज से ब्रह्मा जी के कमंडल में गंगा का जन्म हुआ। ब्रह्मा जी ने गंगा हिमालय को सौंप दिया इस तरह देवी पार्वती और गंगा दोनों बहन हुई। उन्होंने आगे बताया कि तुलसी हमारे जीवन मे अनेक दुखों को दूर करती हैं.आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तुलसी महत्वपूर्ण हैं.उन्होंने कहा कि
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी के पौधे में धन की देवी मां लक्ष्मी का वास होता है। ऐसी मान्यता है कि प्रतिदिन तुलसी की पूजा करने के घर में समृद्धि आती है और आर्थिक परेशानियां कम हो जाता है। तुलसी के पौधे को बहुत ही पवित्र माना गया है, इसे घर के आंगन में भी लगाने का फल बताया गया है.
भारत भूमि जैसी कोई भूमि नही,शक्ति का प्रादुर्भाव इसी राष्ट्र में हुआ है-
भारत वर्ष अपने आप मे तीर्थ है,सनातन संस्कृति सबसे ज्यादा सत्य व चरित्रवान है-
भारतवर्ष अपने आप में तीर्थ है जिस तरह तीर्थस्थानों की परिक्रमा से नई ऊर्जा मिलती है उसी तरह भारतवर्ष की परिक्रमा से भी नई ऊर्जा मिलती है । ये स्वयं प्रमाणित है । आप यहाँ पर किसी से भी भाग्य, भगवान, आत्मा, परमात्मा के बारे में बातें करके देख सकते हैं सभी के पास कुछ-न-कुछ अपने विचार होते हैं और वे विचार हमारे किसी-न-किसी शास्त्र में वर्णित होते हैं । हलाँकि वे उन शास्त्रों से हो सकता है अवगत नही हों । इसलिये यहाँ पर मनुष्य ही नहीं देवता भी जन्म लेकर यज्ञ यागादि अच्छे कर्मों के द्वारा पुण्य अर्जित कर अच्छे लोकों में जाना चाहते हैं । हमारे सनातन धर्म में ही भगवान के अवतार लेने की बात है । अन्य धर्मों मे नहीं क्योंकि सनातन धर्म भारतवर्ष में ही प्रचलित है और यह भारतवर्ष योगभूमि है । अतः यहाँ पर नये कर्म किये जा सकते है और अन्य खण्डों में नये कर्म नहीं हो सकते है - केवल पुरातन कर्मों का भोग ही हो सकता है । अतः देवगण भी यही गान करते हैं - विष्णुपुराण में कहा गया है कि,
गायन्ति देवाः किल गीतकानि
धन्यास्ते तु भारतभूमि भागे।
स्वर्गापवर्गास्पदमार्गभूते
।भवन्ति भूयः पुरुषाः सुरत्वात् ।।
अर्थात् जिन्होंने स्वर्ग और अपवर्ग के मार्गभूत भारतवर्ष में जन्म लिया है, वे पुरुष हम देवताओं की अपेक्षा भी अधिक धन्य हैं । सनातन धर्म का महत्व और चरित्र का गुणगान करते हुए पंडित दुर्गेश शर्मा ने कहा कि,
हिंदू संसार में सबसे अधिक राष्ट्र प्रेमी और राष्ट्रभक्त लोग हैं।ऐसी उत्कृष्ट और गहरी और व्यापक राष्ट्रभक्ति संसार में लगभग कहीं भी नहीं है क्योंकि इतना प्राचीन और स्वाभाविक राष्ट्र विश्व में और कोई नहीं हैं ।
कथा का आयोजन गोवर्धन फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित किया गया है.कलयुग के बारे में बात करते हुए कथाव्यास ने कहा कि इस युग मे भगवान की भक्ति,पूजन और गंगा का स्नान मुक्ति का कारण हैं इसलिए इस युग मे सच्चा कर्म करते हुए भगवत नाम का संकीर्तन ही संकटमोचक है. बता दें कि,प्रतिदिन योग की शिक्षा व प्रशिक्षण कराकर लोगों को आरोग्यता की विधि बताई जा रही है.हवन पूजन के बाद कथा का आरंभ अपराह्न 3 बजे से होती है.
कथा के दौरान प्रमुख रूप से यजमान बने गोवर्धन फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बृजमोहन उपाध्याय,तुलसीराम उपाध्याय ,जगराम उपाध्याय,मिशन सनातन के अध्यक्ष सीए मदन मोहन उपाध्याय,बृजेश उपाध्याय, बीसएफ के लेफ्टिनेंट मनीष सिन्हा सहित सैकड़ों श्रद्धालु व श्रोतागण उपस्थित रहे.विज्ञापन
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