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: खबर काम की : स्विचबोर्ड को बिना हाथ लगाए ही आन-ऑफ हो जाएगी बिजली,जानें कैसे

स्विच बोर्ड को हाथ लगाए बिना औन-आफ हो जाएगी बिजली, जानें डिवाइस की कीमत और चलने का सिस्टम अब घरों, कार्यालयों और हॉल में स्विच बोर्ड पर हाथ रखे बिना बिजली को ऑन-ऑफ की जा सकती है। सुनकर हैरत होगी कि यह काम मात्र दो हजार रुपये में हो जाएगा। दो छात्रों ने आरएफआईडी पर आधारित सिस्टम बनाया। स्विच बोर्ड को हाथ लगाए बिना औन-आफ हो जाएगी बिजली, जानें डिवाइस की कीमत और चलने का सिस्टम कानपुर। अब घरों, कार्यालयों और हॉल में स्विच बोर्ड पर हाथ रखे बिना बिजली को ऑन-ऑफ की जा सकती है। सुनकर हैरत होगी कि यह काम मात्र दो हजार रुपये में हो जाएगा। जय नारायण विद्यालय के दो छात्रों ने आरएफआईडी पर आधारित ऐसा ऐसा सिस्टम तैयार किया है जिससे यह किया जा सकता है। बाजार में उपलब्ध तकनीक बेहद महंगी है। इंटर कॉलेज में टिंकर इंडिया की लैब है जिसमें युवा प्रयोग कर खोज करते रहते हैं। कक्षा 11 में पढ़ने वाले आयुष सचान और अमन सिंह ने लैब के निदेशक कौस्तुभ ओमर और पूर्व छात्र शिवा पटेल की मेंटरशिप में बिजली से जुड़े ऑटोमेशन की नई तकनीक विकसित की है। छात्र इस पर आधारित स्टार्टअप शुरू करने पर भी विचार कर रहे हैं। सिस्टम ऐसे करता है काम आयुष और अमन ने बताया कि आरएफआईडी टैप कार्ड कंट्रोल्ड इलेक्ट्रिसिटी सिस्टम अनोखा है। क्रेडिट कार्ड की तरह टैप या स्वैप करने से इलेक्ट्रिसिटी ऑन व ऑफ की जा सकती है। सामान्यतः बड़े हॉल में एक साथ स्विच ऑन-ऑफ करना कठिन होता है, लेकिन इस सिस्टम से यह मात्र एक स्वैप से किया जा सकता है। जरूरत के हिसाब से अलग-अलग स्थानों पर इस तरह का सिस्टम बनाया जा सकता है। [caption id="attachment_2901" align="aligncenter" width="300"] प्रतीकात्मक फोटो[/caption] कोई भी लगवा सकता है सिस्टम टिंकर इंडिया लैब के निदेशक कौस्तुभ ओमर कहते हैं कि उन्होंने छात्रों की टीम तैयार कर दी है। यदि कोई इस सिस्टम के लिए अप्रोच करता है तो उसे मात्र दो हजार में इसे उपलब्ध कराया जा सकता है। अब स्टार्टअप की भी तैयारी है जिसके लिए कुछ और प्रयोग किए जा रहे हैं। तीन माह चला इसका ट्रायल टिंकर इंडिया लैब में इस उपकरण का ट्रायल तीन माह तक किया गया। कार्ड स्वैप करते ही बिजली और पंखे आदि ऑन हो गए। कार्ड में कई तरह के बदलाव भी किए जा सकते हैं। अलग-अलग इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के लिए भी इस तरह के सिस्टम तैयार किए जा सकते हैं। प्रधानाचार्य डॉ. संत राम द्विवेदी का कहना है कि सीमित संसाधनों से छात्र सराहनीय कार्य कर रहे हैं। यह इसका एक उदाहरण है।

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