ब्रेकिंग

जंगल में लगी आग से दहला क्षेत्र,विद्यालय परिसर तक उठी लपटों से दहशत में विद्यार्थी

राजसत्ता की पुकार,धर्मसत्ता का चाहिए आशीर्वाद!

शंकराचार्य को जान से मारने की मिली धमकी

VHP और RSS प्रमुख की उपस्थिति में संत सम्मेलन

डीजल पेट्रोल के दामों में आई गिरावट,एक्साइज ड्यूटी हुई कम

सूचना

: हड़ताली फेडरेशन पर सरकार का चल सकता है डंडा,सीएम के फरमान के बीच हड़ताल पर संकट,कल का दिन निर्णायक,बढ़ेगी हड़ताल या झुकेगी सरकार

  • राज्य के करीब 4 लाख से ज्यादा अधिकारी कर्मचारी हड़ताल पर - फेडरेशन

  • लगभग 52 विभागों में कामकाज प्रभावित

  • मंत्रालय के कर्मचारी सहित जिला अधिकारी कार्यालयों समेत सभी विभागों के कर्मचारी फेडरेशन के साथ मैदान-ए-जंग में.

  • दो सूत्रीय मांगों को लेकर हैं हड़ताल पर

  • मुख्यमंत्री की दो टूक- कमर्चारी यदि 2 सितंबर को कम पर नही लौटे तो होगी कारवाई, कटेगा वेतन व होगी सर्विस ब्रेक?

   फेडरेशन इस संबन्ध में ले रहा है बैठक

[caption id="attachment_2869" align="aligncenter" width="300"] छतीसगढ़ में कर्मचारी हड़ताल पर[/caption]
रायपुर- छत्तीसगढ़ इस वक्त बिना कामकाज वाला प्रदेश बन गया है। और यह तमगा 22 अगस्त से उस वक्त लगा जब प्रदेश भर के लगभग 52 विभागों के मंत्रालय से लेकर जिला कलेक्टर कार्यालयों तक के कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। अब पूरी तरह से कामकाज ठप्प पड़ा है। जनता परेशान है,सरकार है कि कमर्चारियों की मांगे मानने को तैयार नही,ऐसे में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। हालांकि आज का दिन निर्णायक है,या तो सरकार झुकेगी य फिर कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन,यह तो कल का उगता सूरज ही तय करेगा और वो भी सुबह की 10 बजे की कार्यालयीन घड़ी।
हालांकि सीएम भूपेश बघेल ने मीडिया के सामने यह चेतावनी दे दी है कि 'भय बिन होय न प्रीत' मतलब यह कि कल यानी 2 सितंबर को कर्मचारियों को निर्णय लेना ही पड़ेगा। सीएम बघेल ने दो टूक में कहा कि सरकार ने पहले ही 6 प्रतिशत डीए बढ़ा दिया है,यदि कल कर्मचारी काम पर नही लौटे तो उनके ऊपर होगी कार्यवाही,सेलरी कटेगी व सर्विस भी ब्रेक होगी। जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ फेडरेशन ने एक अहम बैठक बुला ली जिसमे फेडरेशन के पदाधिकारी व कर्मचारियों के बीच अहम बातचीत होगी जिसमें मुख्यमंत्री की चेतावनी का जिक्र होगा। उसी अनुरूप निर्णय लिया जायेगा। कमर्चारियों की गति अब वही हो गई जैसे कहा गया है कि भई गति मोर छंछुन्दर केरी,उगलत निगलत प्रीत घनेरी- छत्तीसगढ़ सीएम के तलखन्दाजी बयान के बाद अब कमर्चारियों के सामने दोहरा संकट खड़ा हो गया है,एक तो पहले ही इन्होंने बड़े बड़े बयान दे दिए थे कि 'जब तक हमारी दो सूत्रीय मांगे पूरी नही हो जाएंगी तब तक हड़ताल जारी रहेगी'। अब 34 प्रतिशत मंहगाई भत्ते व सातवें वेतनमान की बात तो बनती दिख नही रही है,उलट नौकरी पर तलवार लटकने की सरकारी फरमान जरूर सुनाई दे रहा है। ऐसे में क्या करेंगे हड़ताली शूरमा कर्मचारी? एक तरफ नौकरी, बाल बच्चों की जरूरत और राशन पढाई की चिंता,दूसरी तरफ फेडरेशन के साथ जंग की घोषणा और दो सूत्रीय मांगों को लेकर रहने का संकल्प। फेडरेशन के कर्मचारी व अधिकारी इस बात को भी बखूबी जानते हैं कि सरकार की यह बयानबाजी सोची समझी चाल है कि ऐसे में फेडरेशन के कर्मचारी अपनी नौकरी को लेकर दबाव में आएंगे,दो फाड़ भी सकते हैं और वापस भी। ऐसे में हड़ताल का दायरा कम हो सकेगा और सभी काम पर लग जाएंगे,लेकिन फेडरेशन भी यह बखूबी समझता है कि इस बार यदि हड़ताल कमजोर हुई तो फिर कर्मचारी जल्दी संगठित भी नही होंगे। ऐसे में लगता है कि हड़ताल कमजोर होकर सरकार के आगे हड़ताली सरेंडर ही होगें अन्य कोई विकल्प नही दिखता है। क्या कहते हैं सीएम भूपेश- बुधवार को रायपुर एअरपोर्ट में ही मुख्यमंत्री ने अपनी मंशा व सरकारी फरमान साफ स्पष्ट कर दिया था। उन्होंने कहा था कि हमने जो करना था 6 प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ा दिया है। अब कर्मचारियों को वापस काम मे लग जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि 2 सितंबर यानी कल से कर्मचारी यदि काम पर नही लौटते तो उन पर कारवाई की जाएगी। उन्होंने मीडिया के साथ बातचीत में कहा था कि यदि कर्मचारी हड़ताल खत्म कर अपने कामकाज में नही लौटे तो उनकी वेतन कटौती व सर्विस ब्रेक की जाएगी। लगता है यही चेतावनी काम कर जाएगी और हड़ताल खत्म की संभावना बन सकेगी। बहरहाल,कल के सरकारी दफ्तर व हड़ताली जगह बयां करेगी सरकार व फेडरेशन के फरमानों का असर!  

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें