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: अमृतमहोत्सव के सरोवरों पर संकट: कैसे बन पाएंगे अमृत सरोवर?जल-जीवन दोनों पर मंडरा रहा है खतरा

प्रयागराज- सरोवरों पर अतिक्रमण की यदि बात की जाय तो जिले में लगभग हर तीन गाँव बाद अतिक्रमण दृष्टिगत है। तालाबों का अस्तित्व ख़तरे में है वजह है भीटे पर बस्ती की बसाहट.जिसके कारण तालाबों का रकबा सिकुड़ता गया मसलन अब तालाब विलुप्ति के कगार पर हैं। प्रयागराज के यमुनापार के राजस्व गावों की दशा पर यदि बात की जाय तो कई ऐसे गांव हैं जहां अतिक्रमण हुआ है। जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर से 80 किलोमीटर दक्षिण की तरफ स्थित मेजा व कोरांव तहसीलों के लगभग 60 फीसदी गाँव मे 40 फीसदी तालाब अतिक्रमित हैं। कहीं तालाब की जमीन पर खेती हो रही है तो कहीं पूरी की पूरी बस्ती बसा ली गई है। शिकायतों का कोई असर नही पड़ रहा है। कारण,प्रशासन की उदासीनता और लापरवाही सामने आती है। स्थिति यहाँ तक है कि अब सरकारी आवास भी बनने लगे हैं। प्रधानमंत्री आवास,कालोनियां,शौचालय सभी का निर्माण तालाब की जमीन पर धड़ल्ले से हो रहा है।जानते हुए भी आंख बंद कर लेना स्थानीय व जिला प्रशासन की आदत सी हो गयी है। [caption id="attachment_3493" align="aligncenter" width="300"] भोजपुरवा के तालाब पर बसी बस्ती[/caption] न्यायलयीन आदेशों की अवहेलना करना तो प्रशासनिक जिम्मेदारों का फैशन बन गया है। सुप्रीम कोर्ट ने तालाबों से अतिक्रमण मुक्त कराने व उन्हें संरक्षित करने का आदेश कब का दे चुका है,समय समय पर हाईकोर्ट का भी निर्देश मिलता रहता है कि तालाबों पर से कब्जे हटाये जाएं लेकिन राजस्व अमला कान में रुई डालकर अनसुना कर देने में ही विश्वास रखता है तभी तालाबों पर कब्जा बढ़ते ही जा रहा है। यदि हम बात करें उत्तरप्रदेश की तो यहां 1952 में तालाबों की संख्या जो थी वह अब काफी घट गई है,कारण है अतिक्रमण व कब्जा दखल! सन 1952 से राजस्व अभिलेखों में 7,06,145 तालाब दर्ज हैं. राजस्व अभिलेखों में दर्ज इन तालाबों में से 44,317 तालाबों पर वर्तमान में भी अवैध कब्जे मौजूद हैं. हालांकि पिछले कुछ वर्षों में शासन के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए 42,717 तालाबों को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया है. इन तालाबों को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के बाद तालाबों की खोदाई कर पुनर्जीवित किया गया है. वर्तमान में राजस्व अभिलेखों में दर्ज 7,06,145 तालाबों में से 6,61,828 तालाब अतिक्रमण मुक्त हैं. आंकड़े तो यही कहते हैं, लेकिन धरातल पर तालाबों के खत्म होने की हकीकत और भी भयावह है.हकीकत में तालाब अब दिखते नहीं और कहीं हैं भी तो कब्जा कर उसमें बसाहटों का जमावड़ा है। अब कालोनियां भी निर्माणधीन हैं। जिम्मेदार अधिकारियों से जब इस बाबत शिकायत की जाती है तो मामले को दिखवाने व जांच कराने का महज आस्वासन भर मिलता है। इसकी पुष्टि करते हैं सिंकी कला के विवेक सिंह,विवेक बताते हैं कि कई बार तालाब पर कब्जे की बात को लेकर तहसीलदार व एसडीएम मेजा से शिकायत की गई,जानकारी दी गई लेकिन उन्होंने कोई भी कारवाई करना उचित नही समझा.जिससे कब्ज़ेदारो का हौसला बुलंद है,लगातार कब्जा जारी है। ग्राम प्रधान की भी शिकायत मिलीभगत की मिलना लाजमी है। सबसे अधिक तालाबों वाले गांव में तालाबों को सबसे ज्यादा खतरा ग्राम पंचायत भइयां में तालाबों की संख्या 52 है लेकिन वास्तविक में 32 तालाब अस्तित्व में हैं,जिन पर कब्जा है। कुछेक तालाब ही बचे हैं जहां बस्ती नही बस पाई अन्यथा लगभग तालाबों पर बसाहटें हैं,कच्चे व पक्के मकान बन गए हैं। एक तरफ कोर्ट खाली कराने का निर्देश देता है तो दूसरी ओर प्रशासन महज कागजी खानापूर्ति का बुलडोजर चला अपनी कलम से खाका खींचकर जिम्मेदारी से पलड़ा झाड़ने का काम करता है। ग्रामवासी बताते हैं कि अभी हाल में तालाब पर कालोनियों का भी निर्माण हुआ,जिसमे ग्रामप्रधान व उसके प्रतिनिधि पैसे लेकर प्रधानमंत्री आवास को तालाब पर बनवा दिया। निर्माण संबन्धी जानकारी तहसीलदार को भी है,लेखपाल ने कागजी कारवाई भी की है लेकिन दबंगई से तालाब पर कालोनी बना ली गई। इसमे न तो राजस्व प्रशासन अडिग रहा और न ही ब्लॉक के जिम्मेदार अधिकारी। हालांकि ग्राम पंचायत को ही यह शक्ति प्राप्त है कि वह अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर सकता है। लेकिन थोड़े से लालच में जबाबी कार्रवाई दम तोड़ देती है,जिसका खामियाजा तालाबों को भुगतना पड़ रहा है। तालाब सौंदर्यीकरण के नाम पर हो रहा छलावा-  ग्राम पंचायत भइयां में इन दिनों पंचायत कार्य मे खेला होना जारी है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि की यदि माने तो दिनेश कुमार का कहना है कि, पंचायत कोटे से कोई कार्य नही हो रहा है क्योंकि पैसा नही है,हर कार्य ब्लॉक प्रमुख के कोटे से हो रहा है,वे जो चाहे करते हैं। तालाब के भीटे को खोदे जाने पर दिनेश का कहना है कि चारों तरफ के भीटे खोदने की बात हमने कही थी,लेकिन उत्तर तरफ कब्जा है इसलिए उसको कैसे हटाया जाए,यह सब अब ब्लॉक प्रमुख के कोटे पर आधारित कार्य है वे जाने. समझें,भइयां गांव में हो रहे तालाब सौंदर्यीकरण के नाम पर घालमेल को-   पूर्वजों द्वारा खोदे गए तालाब के भीटे को समतल कर दिया गया है। यह समतलीकरण खेत तरफ किया गया और उसी तालाब के दूसरी छोर पर एक व्यक्ति झोपड़ी चढ़ा कर कब्जा किया है,उसे हटाया नही गया । ग्रामीण कहते हैं कि जहां मवेशी चरते थे उसे तो समतल कर दिया गया,लेकिन जहाँ तालाब का घाट था,जहाँ लोग पहले नहाते थे,निस्तारण होता था,अब उस जगह को अतिक्रमित कर लिए जाने से,उसको संधारण में नही लिया जा रहा है क्यों? इसकी वजह प्रधान का सगा होना बताया जा रहा है। ग्रामीणजन कहते हैं कि ग्राम प्रधान का सगा रिश्तेदार होने के कारण कब्जा को हटाया नही जा रहा है,ऐसे में तालाब का सौंदर्यीकरण नही हो पायेगा। महज पैसा खाने के अलावा काम नही हो रहा है। भइयां गांव में पंचायत कार्यों व क्षेत्र पंचायत के कार्यों में गड़बड़ी की आशंका जाहिर की गई है। तालाब को ही निशाना बनाया जा रहा है। लेकिन प्रशासन मौन साधे चुपचाप तमाशबीन बना हुआ है। ऐसे में जिला प्रशासन व तहसील प्रशासन पर सवाल उठना अब लाजमी हो जाता है। ये है प्रावधान- पंचायत राज अधिनियम में प्रावधान है कि पंचायत में प्रस्ताव कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा सकती है। ग्राम पंचायत को अतिक्रमण को हटाने की शक्तियां पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 56 के तहत दी गई है। पंचायत के प्रस्ताव और समझाइश के बाद भी अतिक्रमणकारी द्वारा कब्जा न हटाने पर राजस्व विभाग के अधिकारी से शिकायत कर आगे की प्रक्रिया की जाती है। पंचायत में प्रस्ताव पारित कर सक्षम अधिकारी को सूचना के बाद शासकीय जमीन पर अतिक्रमण हटवाने की कार्रवाई की जा सकती है। यदि गांव के लोगों द्वारा शिकायत की जाती है तो अतिक्रमणकारी के संबंध में पटवारी से जांच कराई जाती है। पटवारी के जांच प्रतिवेदन के आधार पर तहसीलदार द्वारा नोटिस भेजकर अतिक्रमण हटाने के लिए समय दिया जाता है। इसके बाद भी कब्जा न छोडऩे पर सक्षम अधिकारी द्वारा अतिक्रमण हटाने की

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