: बिना गो प्रतिष्ठा हिन्दू राष्ट्र की परिकल्पना अधूरी
Admin
Sat, Nov 9, 2024
- प्रयागराज- "गावो विश्वस्य मातरः" के सूत्र को ध्यान में रखते हुए गो माता को राष्ट्र माता बनाने के लिए इन दिनों ज्योतिर्मठ के वर्तमान पूज्य शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने "गो माता राष्ट्र माता" महाभियान का शंखनाद किया है।
पहले शंकराचार्य जिन्होंने गो प्रतिष्ठा हेतु किए भारत यात्रा-
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक मात्र ऐसे शंकराचार्य हैं जिन्होंने हिन्दू धर्म की आत्मा व मूल कही जाने वाली गौ माता की प्रतिष्ठा व संवर्धन को लेकर भारत की यात्रा की । ज्योतिष्पीठ के 55 वें आचार्य के रूप में प्रतिष्ठित शंकराचार्य ने गो संसद आयोजित कर भारत की यात्रा की है। पूरे देश में पूज्य शंकराचार्य को इसकी सराहना मिल रही है। हिन्दू मंदिरों,वेद गुरुकुल, गाय, गंगा ,गायत्री और सनातनी परंपरा के प्रखर पक्षधर हैं ज्योतिष्पीठाधीश्वर । खुलकर इन मुद्दों पर यदि कोई बात करता है तो शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज, यह सकल विश्व जानता है। इनकी लोकप्रियता भी सत्य व शास्त्र सम्मत बोलने की है।
पीएम मोदी का सांकेतिक समर्थन,बिना गो माता हिन्दू राष्ट्र की बात करना बेमानी -
कुछ दिनों पूर्व भारत के प्रधानमंत्री का अपने निवास में गौ माता को गले लगाकर फ़ोटो वायरल हुआ था। लोगों का कहना है कि यह निश्चित रूप से पूज्य शंकराचार्य के गो प्रतिष्ठा आन्दोलन का ही सकारात्मक परिणाम है,जिसका सांकेतिक समर्थन पीएम मोदी ने किया है। अब हर जगह गाय की चर्चा हो रही है। हिन्दू राष्ट्र की परिकल्पना भी बिना गाय के प्रतिष्ठा अधूरी है। जो लोग भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की बात कह रहे हैं उन्हें पहले गौ माता को राष्ट्र माता बनाने की पहल करनी पड़ेगी। जब भारत की माता गो माता को राष्ट्र माता का सम्मान मिलेगा तो निश्चित रूप से भारत देश भी हिन्दू राष्ट्र बन सकेगा। बिना इसके हिन्दू राष्ट्र की कल्पना करना कोरी साबित होगी।
देश भर के हिन्दू संतों को होना होगा एकजुट,बनाना होगा माहौल -
सनातन धर्म में गाय को वेद माता व वेद लक्षणा कहकर पूजा गया है। सभी प्रमुख अवतारों का कारण ही गो माता हैं।भगवान राम,भगवान कृष्ण के साथ ही सभी महापुरुषों ने गाय की पूजा व रक्षा को मूल बताया है। जो भी संत मंचों पर कथा भागवत कहते हैं उन्हें गो माता को राष्ट्र माता घोषित करने का समर्थन मंचों से करना होगा तभी सार्थक परिणाम सामने आएगा। यदि संतों के मंचों से इस बात की उद्घोषणा होगी तो सभी सनातनी एकजुट होकर माहौल बनाएंगे। बद्रिकाश्रम के शंकराचार्य ने जो लोककल्याण का बिगुल फूंका है उसका स्वागत देश भर के सभी सनातनी संतों व लोगों को शिरोधार्य कर एकजुट होना पड़ेगा। सत्ता भी तभी कोई कानून पारित करती है जब उसका एकजुटता से माहौल बनता है। शायद,इसी की प्रतीक्षा केंद्र सरकार भी कर रही है। हिंदुओं को जगाने का कार्य जगद्गुरू शंकराचार्य कर रहे हैं अब संतों व सनातनियों को भी एकजुट होकर अपने मूल की रक्षा करनी होगी।
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