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: फेरबदल के चक्कर में जीतती बाजी कहीं हार का कारण न बन जाये,सरगुजा व बस्तर का दांव भी पड़ सकता है भारी

रायपुर- कभी कभी अति उत्साह व चालाकी शतरंजी खेल में भी आफत पैदा कर देते हैं और राजनीति तो उलट फेर का गेम ही है। छःत्तीसगढ़ सरकार में इस वक्त जो फेरबदल का खेल चालू हुआ है,वह अंदरूनी कलह का कारण बन रही है,इसका अंदाजा हाल ही में शिक्षामंत्री रहे प्रेम सिंह टेकाम के बयान से लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस्तीफा दिया नही बल्कि ले लिया जाता है। यह बात तब कही जब उनके इस्तीफ़ा देने के बाद पत्रकारों ने शिक्षामंत्री पद से इस्तीफा देने पर सवाल खड़ा किया था। [caption id="attachment_4696" align="alignnone" width="300"] नए कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज[/caption] इधर प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम के संगठनात्मक परफार्मेंस पर संदेह व्यक्त कर बस्तर के सांसद को संगठन की बागडोर सौंप दी गई। बस्तर को भाजपा भी अपनाना चाहती है और कांग्रेस भी कोई कसर नही छोड़ रही है। हाल ही में पीएम मोदी व अमित शाह के प्रदेश दौरे ने कांग्रेसी खेमे में खलबली मचा कर रख दिया,जिसका कारण है चुनाव के पहले मंत्रिमंडल व संगठन में बदलाव। हालांकि भूपेश बघेल की यह चालाकी कांग्रेस को सफलता दिलाने के लिए कही जा रही है,लेकिन मंत्रीमंडल के अधिकारों में फेरबदल से नाराजगी की लपटें दिखाई पड़ने लगी हैं। बस्तर के दीपक बैज को अध्यक्ष बना कर कांग्रेस ने दक्षिणी छोर को मज़बूत करने की कोशिश में लगी है तो वहीं उत्तरी छोर में सरगुजा के राजा टीएस बाबा पर भी उप-मुख्यमंत्री का दांव लगाकर सरगुजा को साधने की जोर आजमाइश की गई है।लेकिन,राजनीति के जानकारों का कहना है कि,यह दांव कांग्रेस के लिए भारी पड़ सकते हैं,क्योंकि राजा साहब उप नहीं बल्कि मुख्य के हकदार हैं,उनको उप बनाकर उनकी उपेक्षा की गई है, जिसका मलाल कहीं न कहीं चुनाव में दिख सकता है।भाजपा इस कांग्रेसी बदलाव से खुश नजर आ रही है,इसकी वजह क्या हो सकती है अभी यह समझ नही आ रहा है। कहा जाता है कि,टीएस बाबा को आम आदमी पार्टी ने छःत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करने का आमंत्रण भी दे चुकी थी,और वहीं भाजपा भी इनको आशा भरी निगाहों से देख रही थी लेकिन आलाकमान को इसकी भनक पड़ते ही उन्हें दूसरे नम्बर का मुख्यमंत्री बना दिया गया। छःत्तीसगढ़ में किसानों के नेता व मंत्री रविन्द्र चौबे का भी कद घटाने की बात हो रही है,कहा जा रहा है कि,चौबे जी,बड़ी आबादी के मंत्री थे उन्हें खेत खलिहान किसानी और पानी से हटाकर स्कूलों की जिम्मेदारी सौंप दी गई। कुछ ही दिनों बाद राज्य में आचार संहिता लग जायेगी और ये नए मंत्री नई जिम्मेदारी का स्वाद भी नही चख पाएंगे। विपक्षी खेमा इसे कांग्रेस सत्ता पक्ष की बौखलाहट बता रहा है। हालांकि इसके परिणाम क्या होंगे यह तो वक्त ही तय करेगा।

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