: सलेक्शन पर इलेक्शन भारी : मुख्यमंत्री,मंत्री ,विधायकों ने बढ़ा लिए अपने वेतन,भत्ते.कर्मचारी-अधिकारी बैठे ही रह गए धरने पर!
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Tue, Jul 26, 2022छत्तीसगढ़/ रायपुर-(राज्य ब्यूरो) एक कहावत है कि राजा अपनी मर्जी का ही मलाई खाता है। यह छत्तीसगढ़ में बखूबी चरितार्थ हो रहा है। आज विधानसभा में सर्वसम्मति से विधायकों,मन्त्रियों व मुख्यमंत्री का वेतन भत्ता में बढ़ोतरी करने का विधेयक पास हो गया। अब 5 साल के लिए निर्वाचित (इलेक्टेड) जनप्रतिनिधियों के वेतन भत्ते में काफी इजाफा हो गया है। लेकिन सलेक्ट होकर नौकरी में आये अधिकारियों कर्मचारियों को अपने अधिकार की लड़ाई सड़क पर लड़नी पड़ रही है। अभी धरने पर पूरे राज्य के कर्मचारी बैठे हुए हैं। उनकी भी मांग है कि उनके हिस्से का भी मंहगाई भत्ता व वेतन बढ़ा दिया जाय। मन्त्रियों के अलावा कर्मचारियों का भी परिवार है और पेट भी। लेकिन सत्ता व विपक्ष की सांठगांठ इस मसले पर फिट रही,चूंकि वेतन तो सत्ता पक्ष का भी और विपक्ष का भी ,बढ़ा तो दोनों का है। और मसले पर राय नही बनती लेकिन बात अर्थ की थी इसलिए बात व सहमति बनना निश्चित था,जो हुआ भी।
कितना किसका बढ़ा वेतन -भत्ता - छत्तीसगढ़ विधानसभा में विधायक दल सत्ता पक्ष व विपक्ष ने एक मत व सर्वसम्मति से वेतन भत्ते के संसोधन बिल पर अपनी सहमति दे कर प्रस्ताव पारित कर लिया है। अब मुख्यमंत्री,मंत्री,संसदीय सचिव,नेता प्रतिपक्ष, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष,तथा विधायकों के वेतनमान व भत्ते में पारित विधेयक 2022 में लगभग 60 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर दी गई है। हालांकि इस बढ़ोतरी से राज्य वित्तीय कोष पर अतिरिक्त भार बढ़ेगा । आइये जानते हैं किसका कितना बढ़ा अर्थ -
कितना किसका बढ़ा वेतन -भत्ता - छत्तीसगढ़ विधानसभा में विधायक दल सत्ता पक्ष व विपक्ष ने एक मत व सर्वसम्मति से वेतन भत्ते के संसोधन बिल पर अपनी सहमति दे कर प्रस्ताव पारित कर लिया है। अब मुख्यमंत्री,मंत्री,संसदीय सचिव,नेता प्रतिपक्ष, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष,तथा विधायकों के वेतनमान व भत्ते में पारित विधेयक 2022 में लगभग 60 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर दी गई है। हालांकि इस बढ़ोतरी से राज्य वित्तीय कोष पर अतिरिक्त भार बढ़ेगा । आइये जानते हैं किसका कितना बढ़ा अर्थ -
- मुख्यमंत्री 135000 रुपये से बढ़कर 205000 रुपये, लगभग 70 हजार की बढ़ोतरी
- मंत्री 130000 रुपये से बढ़कर 190000 रुपये,अर्थात 60 हजार की बढ़ोतरी
- संसदीय सचिव का 121000 रुपये से बढ़कर 175000 रुपये .
- विधानसभा अध्यक्ष 132000 रुपये से बढ़कर 195000 रुपये ,बढ़ोतरी 63 हजार।
- विधानसभा उपाध्यक्ष की 128000 से बढ़कर 180000 रुपये, जिसमे 52 हजार की बढ़ोतरी
- नेता प्रतिपक्ष 130000 से बढ़कर 190000 रुपये जिसमे 60 हजार रुपये की बढ़ोतरी,
- विधायक 95000 रुपये से बढ़कर 160000 रुपये तक हो जाएगी।
- भरे बाजार मधुशालायें नाच रहीं हैं,नशा ही नशा है-छत्तीसगढ़ में सत्य व सेवा था ,जहां मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्री राम की माता का मायका,मतलब भगवान श्री राम का ननिहाल! लेकिन अब सब उल्टा पुलटा हो रहा है। राजनीतिक गलियारों में मात्र राम को राजनीतिक लाभ का लाभांश मानकर चर्चा करते हैं। यदि रियल में रील से हटकर रियलिटी में आएं तो मर्यादापुरुषोत्तम की मर्यादा आज भी नजर आएगी। छत्तीसगढ़ राज्य संसाधनों ,संस्कृति व सेवाभावियों का प्रदेश रहा है। लेकिन कुटिल विचारधारा ने इसे तारतार कर विच्छेदित कर दिया। आज मर्यादा गिरवी है,धौंस दिखाने वाले व अ-मूल छत्तीसगढियावादियों के झूठे प्रपंच ने सामाजिक समरसता को कुचने का कुत्सित प्रयोग किया है। अब यहां अमन औ चमन चाहिए। नशा से ऊब गए हैं लोग। अब शिक्षा,व सम्मान चाहिए,रोजगार का स्वाभिमान चाहिए। विधानसभा में पारित करना था तो नशामुक्ति का ऐलान पारित करते,शिक्षा का चिराग व विकास का आयाम पारित करते युवाओं को नौकरी व रोजगार देने का ध्वनि व राह पारित करते तब तो कुछ अलग सत्ता की खुशबू आती। आज फिर एक राजनीतिक प्रपंच व चुनाव को दूषित बनाने का राह अख्तियार करने की मजबूरी दे डाली जो शायद जन सामान्य पर भारी पड़ेगी।
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