: बिना गो प्रतिष्ठा हिन्दू राष्ट्र की परिकल्पना अधूरी
Sat, Nov 9, 2024
प्रयागराज-
"गावो विश्वस्य मातरः" के सूत्र को ध्यान में रखते हुए गो माता को राष्ट्र माता बनाने के लिए इन दिनों ज्योतिर्मठ के वर्तमान पूज्य शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने "गो माता राष्ट्र माता" महाभियान का शंखनाद किया है।
आज
दोपहर
12 बजे से 2 बजे तक होगी बैठक
आज गोपाष्टमी तिथि के पुनीत पर्व पर वाराणसी में केदारघाट स्थित श्री विद्या मठ में 36 राज्यों के गौ प्रमुखों की बैठक आहूत की गई है। इस बैठक में प्रमुख रूप से ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वयं उपस्थित रहेंगे। दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक प्रमुख विन्दुओ पर चर्चा होगी और रणनीति बनाई जाएगी। इस बैठक में सभी राज्यों के गौ सांसद राज्य प्रभारियों की उपस्थिति होनी है। भारत यात्रा के प्रभारी ब्रह्मचारी मुकुंदानंद जी,महासचिव देवेंद्र पांडेय समेत कई गणमान्य संगठन प्रमुख भी शामिल हो रहे हैं। यह बैठक आगामी कार्ययोजना की रणनीति के लिए है। जिलेवार गो ध्वज स्थापना करने और सनातनियों को एकजुट करने की रणनीति पर मंथन होनी है। माँ गंगा के पावन तट पर बसे श्री विद्या मठ से कई महत्वपूर्ण फैसले हिन्दुओ के मंदिरों की रक्षा व गंगा बचाओ आंदोलन के लिए जा चुके हैं, जिसका सार्थक परिणाम सामने है। अब सनातन की मूल कही जाने वाली गाय माता को राष्ट्र माता बनाने का अभियान युद्ध स्तर पर इसी मठ से संचालित है,जिसका परिणाम भी विजय गाथा लिख सकेगा। क्योंकि पूर्व की सफलता व परिणाम पर ही वर्तमान व भविष्य की कल्पना की जाती है।
गो प्रतिष्ठा को लेकर पूरे भारत की कर चुके हैं यात्रा-
बता दें कि, गो माता को राष्ट्र माता की प्रतिष्ठा दिलाने के लिए पूरे भारत की यात्रा ज्योतिष्पीठाधीश्वर ने कर लिया है। हर राज्य की राजधानी में गो प्रतिष्ठा ध्वज की स्थापना करके हिन्दू समाज को इस महाअभियान में जोड़ने का कार्य किया गया है। इससे पूर्व गो संसद का आयोजन प्रयागराज व दिल्ली में किया जा चुका है। अब पूरे भारत में गाय को राष्ट्र माता बनाने का माहौल बना हुआ है।
पहले शंकराचार्य जिन्होंने गो प्रतिष्ठा हेतु किए भारत यात्रा-
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक मात्र ऐसे शंकराचार्य हैं जिन्होंने हिन्दू धर्म की आत्मा व मूल कही जाने वाली गौ माता की प्रतिष्ठा व संवर्धन को लेकर भारत की यात्रा की । ज्योतिष्पीठ के 55 वें आचार्य के रूप में प्रतिष्ठित शंकराचार्य ने गो संसद आयोजित कर भारत की यात्रा की है। पूरे देश में पूज्य शंकराचार्य को इसकी सराहना मिल रही है। हिन्दू मंदिरों,वेद गुरुकुल, गाय, गंगा ,गायत्री और सनातनी परंपरा के प्रखर पक्षधर हैं ज्योतिष्पीठाधीश्वर । खुलकर इन मुद्दों पर यदि कोई बात करता है तो शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज, यह सकल विश्व जानता है। इनकी लोकप्रियता भी सत्य व शास्त्र सम्मत बोलने की है।
पीएम मोदी का सांकेतिक समर्थन,बिना गो माता हिन्दू राष्ट्र की बात करना बेमानी -
कुछ दिनों पूर्व भारत के प्रधानमंत्री का अपने निवास में गौ माता को गले लगाकर फ़ोटो वायरल हुआ था। लोगों का कहना है कि यह निश्चित रूप से पूज्य शंकराचार्य के गो प्रतिष्ठा आन्दोलन का ही सकारात्मक परिणाम है,जिसका सांकेतिक समर्थन पीएम मोदी ने किया है। अब हर जगह गाय की चर्चा हो रही है। हिन्दू राष्ट्र की परिकल्पना भी बिना गाय के प्रतिष्ठा अधूरी है। जो लोग भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की बात कह रहे हैं उन्हें पहले गौ माता को राष्ट्र माता बनाने की पहल करनी पड़ेगी। जब भारत की माता गो माता को राष्ट्र माता का सम्मान मिलेगा तो निश्चित रूप से भारत देश भी हिन्दू राष्ट्र बन सकेगा। बिना इसके हिन्दू राष्ट्र की कल्पना करना कोरी साबित होगी।
देश भर के हिन्दू संतों को होना होगा एकजुट,बनाना होगा माहौल -
सनातन धर्म में गाय को वेद माता व वेद लक्षणा कहकर पूजा गया है। सभी प्रमुख अवतारों का कारण ही गो माता हैं।भगवान राम,भगवान कृष्ण के साथ ही सभी महापुरुषों ने गाय की पूजा व रक्षा को मूल बताया है। जो भी संत मंचों पर कथा भागवत कहते हैं उन्हें गो माता को राष्ट्र माता घोषित करने का समर्थन मंचों से करना होगा तभी सार्थक परिणाम सामने आएगा। यदि संतों के मंचों से इस बात की उद्घोषणा होगी तो सभी सनातनी एकजुट होकर माहौल बनाएंगे। बद्रिकाश्रम के शंकराचार्य ने जो लोककल्याण का बिगुल फूंका है उसका स्वागत देश भर के सभी सनातनी संतों व लोगों को शिरोधार्य कर एकजुट होना पड़ेगा। सत्ता भी तभी कोई कानून पारित करती है जब उसका एकजुटता से माहौल बनता है। शायद,इसी की प्रतीक्षा केंद्र सरकार भी कर रही है। हिंदुओं को जगाने का कार्य जगद्गुरू शंकराचार्य कर रहे हैं अब संतों व सनातनियों को भी एकजुट होकर अपने मूल की रक्षा करनी होगी।
: भारत की लंबी यात्रा के बाद शंकराचार्य का प्रयागराज में होगा कल भव्य स्वागत
Sat, Nov 2, 2024
प्रयागराज-
सनातन धर्म सत्ता के सर्वोच्च धर्म गुरु ज्योतिर्मठ के पूज्य शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महराज गो प्रतिष्ठा को लेकर राष्ट्र माता घोषित कराने व देश भर में गो हत्या प्रतिबंधित कानून लागू करने के उद्देश्य से पूरे भारत की यात्रा करके कल अपराह्न प्रयागराज पहुंच रहे हैं।
भारत देव ऋषि गो गंगा और धर्म गुरुओं की भूमि है। अखंड भारत की पहचान गुरुकुल और गोकुल से रही है। गाय को माता के रूप में यहां पूजा जाता है,देवताओं अवतरण भी गाय के रक्षार्थ ही हुआ चाहे वह भगवान श्री राम हों या श्री कृष्ण । सनातन में गाय को धर्म का मूल माना जाता है। आजकल सनातन कि गूंज तो दिखाई पड़ती है लेकिन गाय की हत्या और प्रताड़ना ज्यादा है। गाय की हत्या बन्द हो और राष्ट्र माता का सम्मान मिले इस हेतु ज्योतिषपीठ के वर्तमान शंकराचार्य ने एक बहुत बड़ा संकल्प लेकर गो माता राष्ट्र माता प्रतिष्ठा आन्दोलन का शंखनाद करके पदयात्रा की और भारत की यात्रा पूर्ण की । इस यात्रा से पूरे देश में गो माता को लेकर एक बड़ा सकारात्मक माहौल बना हुआ है। यह पूज्य शंकराचार्य के महाअभियान का ही परिणाम है कि कुछेक राज्यों ने गौ को राज्य माता घोषित कर दिया है। अब भारत की यात्रा पूर्ण करके प्रयागराज पहुंच रहे हैं। शंकराचार्य जी का रविवार को अपराह्न 3 बजे प्रयागराज आगमन हो रहा है।
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ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महराज[/caption]
3 बजे पहुंचेंगे प्रयागराज-
जगद्गुरु शंकराचार्य का कल अपराह्न 3 बजे बमरौली हवाई अड्डा में आगमन होगा,वहां से गोपीगंज के लिए प्रस्थान करेंगे। गोपीगंज एक धार्मिक कार्यक्रम में महराज जी का आशीर्वचन होगा तत्पश्चात काशी के लिए प्रस्थान करेंगे।
एअरपोर्ट में होगा भव्य स्वागत -
पूज्य शंकराचार्य का स्वागत बमरौली हवाई अड्डा में भव्य रूप से किया जाएगा। लंबे काफिले के साथ शहर में कई जगहों में उनका स्वागत वंदन किया जाएगा और फिर गोपीगंज भदोही के लिए प्रस्थान करेंगे। शंकराचार्य का स्वागत प्रयागराज के प्रतिष्ठित गणमान्य लोगों द्वारा किया जाएगा। फिर वहाँ से भक्तों का काफिला काशी के लिए प्रस्थान करेगा। शंकराचार्य के आगमन को लेकर प्रयागराज वासियों में काफी प्रसन्नता व दर्शन हेतु उत्साह है। भारत यात्रा के बाद ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य का पहली बार प्रयागराज आगमन हो रहा है।
: कश्मीर से कन्याकुमारी तक लहराया गो प्रतिष्ठा ध्वज,ये हैं ऐसे पहले शंकराचार्य
Tue, Oct 29, 2024
प्रयागराज -
वैसे तो भारत भूमि अनेकों अवतारों के शौर्य गाथाओं से परिपूर्ण है। ऋषि मुनियों तपस्वियों के संकल्प साधना के तप बल से भारत गौरवांवित है। धार्मिक महत्वों व सनातन के तेज से परिपूरित हमारी अखंडता जब खंडित व दिग्भर्मित होने लगी थी,तब पुरातन सनातन संस्कृति व धर्म की रक्षा हितार्थ एक सूत्र में बांधने का कार्य आदि गुरु शंकराचार्य ने हजारों वर्ष पहले किया था। आज बचे हुए मन्दिर व पूजन पाठ,सभ्यता,वेद वेदांग की शिक्षा आदि शंकराचार्य के त्याग व संकल्प की याद कराते हैं। हमारे हिन्दू धर्म के सर्वोच्च धर्म गुरुओं,आचार्यों ने अपना बलिदान देकर सनातन की रक्षा की । धर्म कभी दासता स्वीकार नहीं करता, अनर्गल प्रपंच के आगे घुटने नहीं टेकता । और जो घुटने टेक दे वह धार्मिक महत्व को नहीं समझता । धर्म की धार धीमी तो है लेकिन सटीक व लक्ष्य भेदी है। जो सच होगा वह प्रखर होगा,जो सनातन का धर्म उपदेशक होगा वह निश्चितरूप से शास्त्र व सत्य का पक्षधर होगा,और जो सत्य व शास्त्र सम्मत नहीं वह धर्म का गुरु हो ही नहीं सकता ।
जो गाय, गंगा, गायत्री,गीता, गुरुकुल,गोकुल व मन्दिर की चिंता नही करता वह सनातनी भला कैसे हो सकता है।
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जगह जगह जोरदार स्वागत हुआ पूज्य शंकराचार्य जी का[/caption]दशको पूर्व हमारे देश व समाज में गाय,गुरुकुल की स्थिति इतनी भयावह नहीं थी,जितनी आज हो गई है। आज सत्ता में शोर है लेकिन शांति का भोर नहीं है,रोशनी तो है लेकिन सूर्य का वह तेज नहीं । वह कलरव नहीं जो पहले था,वह गोधूलि बेला नहीं जहां गायें रंभाती थी। पहले गायों की पूजा होती थी,गो वंश को सहेजा जाता था,लेकिन आज काटा जाता है। इसी पीड़ा को दूर करने सनातन के प्रमुख आचार्य ने गौ प्रतिष्ठा आंदोलन का बीड़ा उठाया है।
विरले ही होते हैं,जो गायों की चीख व करुण पुकार को सुनकर विचलित हो जाते हैं उनकी रक्षा के लिए,सनातन की मूल को सहेजने के लिए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती उनमें से एक हैं।जी हां, ज्योतिष्पीठ के वर्तमान शंकराचार्य जो काफी प्रखर-प्रचंड व तेज तर्रार देखे जाते हैं वे आजकल एक महाअभियान में बड़ी स्पष्टता के साथ संकल्पित हैं। गो संवर्धन व गो प्रतिष्ठा के कार्य को लेकर पूरे भारत की यात्रा पर निकलने वाले शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अखंड भारत की परिक्रमा करके पूरे देश में गौ के प्रति एक सकारात्मक माहौल खड़ा कर दिया है। "गो प्रतिष्ठा ध्वज भारत यात्रा" की जोरदार चर्चा होने लगी,यह यात्रा शंकराचार्य ने अयोध्या से आरंभ की थी।
दिल्ली में चातुर्मास पूर्ण करने के तुरंत बाद भगवान श्री राम की जन्मभूमि से गो प्रतिष्ठा का संकल्प यात्रा आरंभ कर भगवान श्री कृष्ण की नगरी वृंदावन में यात्रा को विराम दिया। ऐसी यात्रा करने वाले ये पहले शंकराचार्य हैं,जो गो प्रतिष्ठा की अलख जगाने पूरे भारत भूमि की प्रदीक्षणा की।
पूर्वोत्तर राज्यों में भी लहराया गो प्रतिष्ठा ध्वज-
पूर्वोत्तर के राज्यों में जहां सनातनी विचारधारा व संस्कृति पर आज भी कुठाराघात है,जहाँ गायों की बहुतायत में हत्या कर उनके मांस का भक्षण किया जाता है। जहाँ बड़े से बड़ा हिन्दू नेता या अपने आपको तुर्रम खा समझने वाला व्यक्ति मौन हो जाता है,
वहां शंकराचार्य पहुंचे और अपनी बात रखी,गौ ध्वज को लहराकर लौटे।
भले उन्हें राजनीतिक कुंठित मानसिकता का दंश झेलना पड़ा हो लेकिन अपने संकल्प को डिगने नही दिया,झंडा लहराकर ही आये। मेघालय में 22 हजार फीट की ऊंचाई पर होकर सनातनियों से गौ माता को राष्ट्र माता बनाने की अपील की,और मेघों के समीप,बीच जाकर गो ध्वज का संकल्प पूर्ण किया। यह तब होता है जब मन में कोई कुटिलता न हो कोई दुविधा न हो और अपना उद्देश्य साफ हो। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य का स्टंट सनातनियों के हित की मूल गौ प्रतिष्ठा को लेकर बिल्कुल क्लियर है।
सनातनियों में जगी आस -
भारत के लगभग हर राज्य में स्वामी जी की संकल्प पताका को स्थान मिला और उनकी बातों को सम्मान मिला है। चाहे वह जम्मू कश्मीर हो,लेह लद्दाख हो या फिर कन्याकुमारी। उत्तर से दक्षिण,पूरब से पश्चिम सभी दिशाओं के राज्यों में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महराज के सार्थक उद्देश्यों की पूर्ति का बिगुल बजा है। लोग एकजुट होकर गौ माता को राष्ट्र माता बनाने का अपना समर्थन दिया है।
सियासत के गलियारों में मची खलबली -
जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौ प्रतिष्ठा आंदोलन की नींव रखी और गर्मी में पैदल यात्रा शुरू की तो दिल्ली दरबार में हड़कंप मच गया। जब सन्यासी नंगे पांव निकलता है तो राहें भीं थर्राने लगती हैं,कंकड़ पत्थर व खड़बीहड़ रास्तों से चलकर दिल्ली संसद भवन तक पहुंचते पहुंचते सत्ताधीशों के बीच खलबली मच गई थी। उसके बाद,इस यात्रा से नेताओं ने गाय को गले लगाकर फ़ोटो खिंचवाया और सांकेतिक रूप से बताया कि वे भी गौ प्रेमी हैं। जो कि राजनीतिक जीवन की एक नई चाल कैमरे में कैद हो रही थी। कोई आशीर्वाद के बहाने आया तो कोई पादुका पूजन करने आगे आया। हर दल के वरिष्ठ नेताओं ने मिलकर आशीर्वाद लिया।
महाराष्ट्र ने दिखाई तत्परता,राज्य माता की घोषणा-
महाराष्ट्र में तो सकारात्मक रुख इतना था कि, राज्य सरकार ने गाय को राज्य माता का दर्जा देने की घोषणा कर दी और मंच पर ही जहां शंकराचार्य उपस्थित थे, उनके हाथों में मुख्यमंत्री ने स्वयं जाकर प्रस्ताव की कॉपी पकड़ाया। कइयों ने आशीर्वाद लिया और अपने आपको गो माता को राष्ट्र माता बनाने की मुहिम का प्रबल समर्थक बताया। पर,चर्चा व माहौल देश भर में बना,सरकारों के माथे पर बल आ गया की गाय को राष्ट्र माता कैसे बनाया जाय।[caption id="attachment_4850" align="aligncenter" width="300"]
महाराष्ट्र के फडणवीस श्री शंकराचार्य जी का आशीर्वाद ले रहे[/caption]इस भारत यात्रा से शंकराचार्य की छवि काफी अच्छी हुई। जो नकारात्मक छवि इनकी बनाई गई थी,उस नैरेटिव को तोड़ कर पॉजिटिव माहौल बनता दिख रहा है। ये पहले ऐसे शंकराचार्य हैं जो कि गौ की हत्या को बन्द कराने, गो के संवर्धन, सम्मान को लेकर पूरे भारत की अनवरत यात्रा की । अब यात्रा का विराम कर छत्तीसगढ़ प्रवास पर हैं। दीपावली पूजन बाद नए अध्याय की नई शुरुआत कर सकते हैं पूज्य शंकराचार्य महराज ।