: प्रयागराज कुम्भ में महाशिवरात्रि की पूर्व संध्या पर उमड़ी भीड़
Tue, Feb 25, 2025
प्रयागराज -
आस्था और विश्वास को कोई भी परेशानी उसे डिगा नही सकती। इन दिनों प्रयागराज में कुम्भ स्नान चल रहा है। 10 जनवरी से 26 फरवरी तक मेले की आधिकारिक घोषणा की गई है। कल 26 फरवरी है महाशिवरात्रि का दिन,आधिकारिक घोषणा के अनुसार कुम्भ स्नान का अंतिम दिवस। लेकिन भीड़ इतनी हर दिन बढ़ते जा रही है कि थमने का नाम ही नही ले रही। सड़कें जाम हैं,गलियों में भी पैदल यात्री सिर व हाथ में झोला लादे बस चले ही आ रहे हैं। ऐसा लगता है पूरा भारत यहीं कुम्भ में ही समा गया है।
सभी तटों पर लगा है जमघट-
संगम तट पर,अरैल घाट,सोमेश्वर घाट,गंगा का कोई भी तट खाली नही दिख रहा है। प्रयागराज के स्थानीय लोग भी देख कर आश्चर्य चकित हैं कि इतनी भीड़ तो कभी नही आई। इस बार करोड़ों करोड़ सनातनी स्नान कर चुके हैं । सरकारी आकंड़े के मुताबिक लगभग 60 करोड़ लोग स्नान कर चुके हैं। अभी और भी तांता लगा ही है।
कल महाशिवरात्रि का स्नान है। घाट व मन्दिर सब सजे हैं। लोगों की आस्था भी टूट पड़ी । प्रशासन चाक चौबंद है। जो गाड़ियां बाहर से आ रही हैं उन्हें 12 से 20 किमी पहले ही पार्किंग में रोकी जा रही है ताकि घाट पर व मेला परिसर में वाहनों का दबाव न पड़े फिर भी लोग इधर उधर से वाहन लेकर पहुंच ही जा रहे हैं।
चले गए हैं साधु संत हटने लगा है पण्डाल -
साधु संत नागा,शंकराचार्य, महामंडलेश्वर सभी के पण्डाल लगभग सिमट गए हैं। नागा साधु माघी पूर्णिमा का स्नान करके चले गए हैं। पण्डाल उखड़ रहे हैं और उखड़ भी गए हैं। श्रद्धालु आस्था की डुबकी दिन रात लगा रहे हैं।
पूरा फरवरी माह तक रह सकती है भीड़-
स्थानीय लोगों और प्रशासन की माने तो श्रद्धालुओं के तांता को देखकर यही अंदाजा लगाया जा रहा है कि अभी भीड़ इसी तरह से बनी रहेगी। फरवरी माह तक लोग आते रहेंगे। जो लोग पर्व में स्नान नही कर हैं वे अभी आगे भी आते रहेंगे।
सभी आकंड़े फेल,उम्मीद से ज्यादा लोगों ने लगाई डुबकी-
प्रयागराज का कुम्भ सबसे ऐतिहासिक रहा । इस बार सभी आकंड़े उम्मीद पार कर गए। 40 से 45 करोड़ का आंकड़ा प्रशासन लगाया था लेकिन उससे कहीं ज्यादा लोगों ने अभी तक संगम में डुबकी लगा चुके हैं। उम्मीद अब यह देखी जा रही है कि 70 करोड़ तक गिनती जा सकती है।
: यह कुम्भ होगा ऐतिहासिक सजेगी परमधर्म संसद यहां होगा 324 कुंडीय महायज्ञ
Sat, Jan 4, 2025
प्रयागराज-
भारत से भारत को जोड़ने और भारत की संस्कृति को समझने का पर्व ही कुंभ है ।
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जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज का गौ प्रेम[/caption]
ज्योतिर्मठ के शंक़राचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का कुंभ में मंगलप्रवेश 9 जनवरी को ।
हर 6 वर्ष में अर्धकुंभ, 12 वर्ष में कुंभ और 12 कुंभ बीतने के उपरांत 144 वर्षों में महाकुंभ का पर्व होता है, जो इस सदी में हमें दर्शन और स्नान हेतु प्राप्त हुआ है । अर्थात् वर्तमान समय संपूर्ण विश्व के सनातनी, वैदिक, हिन्दू धर्म के लिए सौभाग्य है ।
इस कुंभ महापर्व से मानवता और विश्व कल्याण की कामना करने वाले परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिषपीठाधीश्वर बद्रिकाश्रम हिमालय जगदगुरु शंकराचार्य स्वामीश्री अविमुक्तेश्वरानंद : सरस्वती 1008, कुंभ में मंगलम् प्रवेश दिनांक 9 जनवरी 2025 को करेगे। शंकराचार्य इस परम् पवित्र महापर्व को विशिष्ठता प्रदान करने हेतु ही परम् धर्म संसद का आयोजन कर रहे है जो 27 दिन तक चलेगी इस धर्म संसद में नीतिगत-धर्मगत-राष्ट्रगत निर्णय के उपरांत प्रतिदिन धर्मादेश जारी किया जाएगा । यह धर्मादेश भारत में धर्म और राष्ट्र के सबलता का आधार बनेगा ।
धर्म संसद के 27 विषय निर्धारित है, जिनपर प्रतिदिन चर्चा होगी ।तात्कालिक परिस्थितियों को देखते हुए अन्य महत्वपूर्ण विषय भी चर्चा में समाहित किये जा सकेगे ।धर्म संसद का आरंभ दिनांक 10 एवं 11 जनवरी को गो संसद के रूप में होगा तदुपरांत धर्म संसद में अन्य 26 विषय समाहित होगे, धर्म संसद निरंतर 11 फ़रवरी 2025 तक चलेगी।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी द्वारा गो माता की रक्षा हो और हिंदुओ का कल्याण हो इस हेतु कुंभ में पहली बार 324 कुंडीय महायज्ञ का आयोजन भी किया जा रहा है । 1100 विद्वान् पुरोहितों द्वारा यह अद्भुत महायज्ञ संपन्न होना है ।ज्ञात हो कि भारत में मूल नस्ल की देशी गो माता (रामा गाय) पर आज संकट है इस गो प्रधान देश में मात्र 53 नस्ल की ही गो माता आज शेष है, संपूर्ण राष्ट्र की जनता उन गो माता के दर्शन का लाभ पूज्यश्री शंक़राचार्य जी के कुंभ प्रयाग शिविर में कर सकेगे जिसकी व्यवस्था की जा रही है ।परम धर्म संसद का हो
धर्मसंसद् 1008 की संरचना को भव्यता प्रदान करते हुए उसके स्वरूप का निर्धारण किया गया है, जिसके अनुसार 543 संसदीय क्षेत्रों से गो प्रतिनिधि(गो संसद), 170 सन्त-विद्वान्, 99 देशों से धर्मप्रतिनिधि, 8 परमधर्मांसद, 8 अन्यधर्मांसद, 108 धर्माचार्य/संस्थाप्रतिनिधि, (4) शंकराचार्य या उनके पीठों के प्रतिनिधि, 4 धामों के प्रतिनिधि, 7 धर्मपुरियों के प्रतिनिधि, 12 ज्योतिर्लिंगों के प्रतिनिधि, 13 अखाडों के प्रतिनिधि, 51 शक्तिपीठों के प्रतिनिधि, 5 वैष्णवाचार्यों के प्रतिनिधि, 12 धर्मसंस्थाओं के प्रतिनिधि), 36 धर्मसेवाप्रमुख/प्रभारी/सुयोजक, 36 राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि शामलित होगा इस प्रकार कुल 1008 आसनों की संख्या से सुसज्जित होगी धर्म संसद।जैसे माला में सुमेरु सबसे ऊपर शोभायमान होता है पर गिना नहीं जाता। उसी तरह इस धर्मसंसद् 1008 में प. परमधर्माधीश ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंक़राचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती 1008, शोभायमान होंगे।
पूज्य शंकराचार्य जी की कुंभ प्रवेश मंगलम यात्रा दिनांक 9 जनवरी 2025 को पथरचट्टी रामलीला मैदान से घंटाघर चौराहे से मुट्ठीगंज बड़ा चौराहा होते हुए कुंभ की पावन पवित्र धरा, गंगा तट पर निर्मित श्री ज्योतिषपीठ शंकराचार्य शिविर मोरी मार्ग सेक्टर 19 तक निकलेगी ।
सनातन धर्म की रक्षा हेतु कई आंदोलनों में रही भूमिका-
गंगा माता की पवित्रता को बचाने रीवर-सीवर को अलग करने, गंगा को राष्ट्र नदी घोषित करने का सार्थक यत्न, रामसेतु के संरक्षण के लिए आंदोलन, राम जन्मभूमि की मुक्ति हेतु आंदोलन-मुक़दमे में गवाही और विधि विपरीत प्राण प्रतिष्ठा हेतु मुखरता, काशी में प्रचीन मन्दिरो के विध्वंस के विरोध हेतु सदैव ही निस्पक्षता और प्रखरता से डटे रहने वाले जिन्होंने नंगे पॉव गोवर्धन गिरिराज जी की प्रदीक्षणा कर दिल्ली संसद भवन तक की यात्रा की, भारत के सभी राज्यो में गो ध्वज स्थापना करते हुए संपूर्ण देश की प्रदीक्षणा करने वाले पूज्यश्री शंक़राचार्य जी की प्रवेश शोभायात्रा की भव्यता और दर्शन हेतु समस्त सनातन, वैदिक, हिन्दू सादर आमंत्रित है ।
गो हत्या बन्द करने का लिया जाएगा संकल्प-
प्रेस वार्ता कर उक्त जानकारी शंकराचार्य जी के विशेष प्रतिनिधि व कुम्भ मेला प्रभारी ब्रह्मचार मुकुंदानंद जी और परम धर्म संसद के सचिव देवेंद्र पांडेय ने बताई । उन्होंने कहा कि पूज्यश्री के प्रयाग कुंभ शिविर में मात्र उन्हें ही प्रवेश होगा जिन्होंने गो हत्या बंद करने के संकल्प स्वरूप गो मतदाता की शपथ ली होगी/शपथ लेंगे।
: तीर्थराज प्रयाग के भव्य कुम्भ में मनकामेश्वर महादेव का होगा दिव्य दर्शन
Mon, Dec 30, 2024
प्रयागराज
- तीन नदियों का संगम कहें या सनातन संस्कृति के मिलन का अद्भुत योग दोनों का पर्याय प्रयागराज ही है। बारह वर्षों बाद प्रयागराज में कुम्भ का मेला लग रहा है। यह कुम्भ कई मायनों में महत्वपूर्ण है। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का दौरा आये दिन प्रयागराज में होना इस बात का प्रमाण है कि यह अद्भुत कुम्भ सनातन संस्कृति का मिजाज व राजनीति की एक नई दिशा का नेतृत्व करेगा।
सीएम योगी के महत्वाकांक्षी कुम्भ पर सनातनियों के आस्था का बल और अधिक गौरव प्रदान करता है। इस बार 2025 का कुम्भ और ज्यादा महत्वपूर्ण है। प्रयागराज पूरे विश्व की निगाहों पर केंद्रित रहेगा। संगम तट पर आस्था की डुबकी लगाई जाएगी। चारों पीठ के पूज्य शंकराचार्य इकट्ठे होंगे। परमधर्म संसद सजेगी और गो संसद भी । प्रयागराज से उठ रही गो माता राष्ट्र माता की गूंज इस बार वैश्विक स्तर पर सुनाई देगी।
सन्तो,महंतों,नागा साधुओं और देश देशांतर के विविध रूपों का दर्शन प्रयागराज में होने जा रहा है। यहां
अति प्राचीन पीठ श्री मनकामेश्वर महादेव मन्दिर जो कि भगवान भोलेनाथ का साक्षात आभास कराता है। कहा जाता है कि प्रयागराज में आने वाले जो श्रद्धालु संगम स्नान के पहले मनकामेश्वर महादेव का दर्शन करते हैं उनकी मनचाही इच्छा जरूर पूरी होती है ऐसी मान्यता है। इस लिए यहां देश के हर कोने से सनातनी पहुंचते हैं। यह यमुना नदी के नए पुल के समीप यमुना तट पर स्थित है।
इतिहासकार बताते हैं कि इलाहाबाद अकबर के किले से जोधा यहां आकर दर्शन करती थी । जोधा का यह हिन्दू संस्कार था उनकी मान्यता यहां सरोपरि रही है। और इसी तरह बंधवा के लेटे हुए हनुमान मंदिर का दर्शन अद्भुत है।
सभी तीर्थों का राजा है प्रयागराज। इसीलिए इसे तीर्थराजप्रयाग कहते हैं। संकल्प,तप,साधना का संगम है प्रयागराज। दो नदी गंगा,यमुना के साथ ही संतों विद्वानों के सरस्वती रूपी ज्ञान का संगम कराता है तीर्थराज प्रयाग।माघ मास में मास परायण करने का कल्पवास करने का पौराणिक महत्व है। संगम तट पर गंगा तट पर साधु संत, कल्पवासी घास फूस की कुटिया बनाकर,टेंट लगाकर साधना हेतु कड़ाके की ठंड में सुबह स्नान दान करके अपने जीवन के लौकिक व पारलौकिक पुण्य को अर्जित करते हैं। महाकुम्भ सनातन संस्कृति व परम्परा के कई रंगों का मिलन है,आस्था व संस्कार एवं पुरातन संस्कृति की विरासत है। प्रयागराज अब सज चुका है।