शंकराचार्य की हुंकार से थर्राई सत्ता : संगम तट पर हुए संत अपमान से गंगा की रेती का कण कण नाराज
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Wed, Jan 28, 2026
शंकराचार्यों के क्रुद्ध चेहरे से मचा सनातन में बवाल -
माँ गंगा की रेत में सनातन का जो अपमान हुआ उससे संत ही नहीं बल्कि गंगा मैया भी स्तब्ध हैं।
सत्ता के विरुद्ध उठ रही चिंगारी में विपक्ष का तड़का
चारो शंकराचार्य हुए एक मत
प्रयागराज- हिंदुस्तान में एक बार पुनः धर्म जागरण का अभियान गतिशील दिखाई दे रहा है। लोग अफसोस भी कर रहे और दबे सुर से राग भी अलाप रहे हैं । सत्ता के आसपास के साधु संतों को डर भी लग रहा है और शंकराचार्य के धार्मीक अभियान के समर्थन में न शामिल होने से शर्म भी आ रही है।
सन्तों में दो फाड़ हो गया है। एक योगी आदित्यनाथ के गुणगान के कसीदे पढ़ने वाले और दूसरे सनातन धर्म की माला जपने वाले। जो माला का जाप करते हैं वह शंकराचार्य जी के साथ हैं और जो कसीदे पढ़ते हैं वह सत्ता की हनक के साथ।

सत्ताधारी सन्तो को धर्म से क्या लेना देना -
प्रयागराज को तीर्थों का राजा कहा जाता है। यहां के संगम में पूरा भारत समा जाता है प्रत्येक वर्ष के माघ में,क्योंकि माघ मास में बहुत बड़ा मेला यहीं पर लगता है। अर्धकुंभ व कुंभ का आयोजन भी इसी संगम तट पर होता है। यह भी सत्य है कि मां गंगा का उदगम संतों व ऋषियों की तपस्या का ही फल है। राजा भगीरथ का मार्गदर्शन उन ब्राह्मण ऋषियों व तपस्सियो ने किया जो शिखाधारी थे जो भगवा वस्त्र पहनकर धर्म के अनुसार जीवन जीते थे। माँ गंगा में लाखों वर्षों की मर्यादा समाहित है,सन्तो का तप समाहित है,मंत्रों की शक्ति और यज्ञों का फल समाहित है।
राजसत्ता का मद अब उन सभी संस्कारों परंम्पराओ को निस्तनाबूत कर रहा है जो प्राकृतिक रूप से पीढ़ी दर पीढ़ी सनातनी जनता में पोषित होता रहा है। इसी परंपरा में सनातन के सूर्य जगद्गुरु शंकराचार्य का तेज समाहित है। लेकिन सत्ता की कुटिलता व स्वकल्पित राग द्वेष ने साधु संतों व बटुकों की उस अस्मिता को खंडित किया उस स्वाभिमान पर प्रहार किया जिसे लोग अपना सनातन धर्म समझते हैं अपना बल समझते हैं।
भगवा वेश में राजनीति करना और धर्म को संरक्षित करना दुविधा को अवश्य इंगित करता है।
वर्षों पुरानी आचार्य परंपरा को खत्म करने का प्रयास -
परंपरा प्राप्त आचार्यों को कुचलने का कुचक्र देश की सभ्यता व अखंडता को मटियामेट कर रहा है। सन्तो के इस अपमान से पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने कुद्ध होकर कहा कि सत्ता का मद और सन्तो का शिखा पकड़कर अपमान करना इस शासन सत्ता को उखाड़ फेंकेगा। आगे उन्होंने कहा कि ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद उनके लाडले प्यारे हैं और संकल्प के धनी हैं उन्हें छेड़ना यानी युद्ध को निमंत्रण देने जैसा है।
प्रशासन ने किया अक्षम्य अपराध - द्वारकापीठ
द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य ने माघ मेले में घटित घटना की निंदा करते हुए कहा है कि गंगा तट पर लगने वाला माघ का मेला सन्तो का है। और इसमें सन्तो बटुकों व सन्यासियों का अपमान कर उन्हें पीटना और शंकराचार्य को गंगा स्नान से रोकना जघन्य अपराध व पाप है। ऐसा करने वालों को गो हत्या का पाप लगता है। इस तरह से ज्योतिष्पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पक्ष में 3 शंकराचार्य भी मैदान में उतर आए हैं और प्रयागराज की इस घटना को निंदनीय बताया है। यह घटना सरकार व सनातनी समाज दोनों के लिए नुकसानदायक है।
भुगतना पड़ेगा खामियाजा-
गंगा तट पर पहुंचे अनेकों साधु सन्तो ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी के समर्थन में अपनी अपनी राय व्यक्त की है।
सत्ता का कोई हक नही की वह शंकराचार्य के साथ अव्यवहारिक प्रश्न करे उन पर शासन करे। सनातन धर्म के धर्मगुरु का अपमान हिंदुस्तान के हिन्दू तो कतई बर्दाश्त नही करेंगे। अलग अलग स्थानों से पहुंचे लोगों ने अपना पक्ष रखते हुए मौनी अमावस्या पर हुई इस घटना का विरोध प्रदर्शन किया और रोष व्यक्त किया ।
जिस प्रकार से आस्था की नगरी संगम में मां गंगा के पवित्र तट पर तांडव मचाया गया, सन्तो को घसीटा गया उनकी चोटी पर प्रहार किया गया। दण्डी स्वामी को घूंसों से व 90 वर्षीय बुजुर्ग को पुलिसिया बूटों से रौंदने का प्रयास किया गया वह बिल्कुल भी क्षमा योग्य नही है। उसकी सजा तो मिलनी ही चाहिए। जिस कानून की व्यवस्था बनाने का हवाला देकर सन्तो व पूज्य शंकराचार्य को स्नान से रोकने का संगठित प्रयास किया गया वह पुलिस प्रशासन की तानाशाही रवैया को उजागर करता है।
नीतिशास्त्र में यह उल्लेखित है कि विनाशकाले विपरीत बुद्धि और उसी बुद्धि का प्रयोग माघ मेला में मौनी अमावस्या के समय किया गया। इसका प्रायश्चित यदि सत्ता नही करती तो सनातन उसे उखाड़ फेंकने में एकजुट हो रहा है। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने इसकी शुरुवात कर दी है। सप्ताह भर से ज्यादा दिन हो गए लगातार सत्ता व प्रशासन को सावधान कर रहे हैं चेता रहे हैं ।
मां गंगा के कण कण से उठ रही सनातन की गूंज-
सनातन धर्म में गंगा मैया का स्थान महत्वपूर्ण है। पाप नाशिनी माँ गंगा के तट पर बैठे हिन्दू धर्म के सर्वोच्च धर्म गुरु ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती टेक लगाकर लगभग 10 दिनों से बैठे हैं। उनका कहना है कि हमारी यह टेक माँ गंगा से है। मां गंगा हमें स्नान कराती हैं या नहीं यह विषय माँ-बेटे के बीच का है। कोई भी वेषधारी हमें हमारे इस अधिकार से वंचित नही कर सकता। शंकराचार्य जी महाराज का कहना है कि सत्ता की हठधर्मिता उसे पदच्युत कर सकती है जो अड़ियल रवैया अपना कर साधु सन्तो का अपमान की है और अभी तक उसे गलती का बोध नही हुआ और सन्तों से क्षमा याचना करने नही आया। इस सत्ता की आधारशिला हमारे धर्म के साधु सन्तो व सनातनियों के वोट पर टिकी है। स्वामी श्री ने कहा कि सनातन के सर्वोच्च धर्माचार्य का अपमान करना सन्तो की शिखा पकड़कर मारपीट कर उन्हें प्रताड़ित करना सनातनी बर्दास्त नही करेगा,इसका हिसाब समय आने पर जरूर लेगा ।
शिविर के बाहर लगी भीड़ भी इस अपमान से आहत और उग्र दिखी।
हर जगह सुलग रही बदले की आग-
लगभग हर प्रान्त से लोग पहुंचकर शंकराचार्य जी का समर्थन कर रहे हैं।इसकी आग धरने प्रदर्शन,ज्ञापन और यूपी सरकार के पुतला दहन के रूप में दिखाई दे रही है। लोग यह वक्तव्य दे रहे हैं कि आगामी चुनाव में नकली सनातन हटाकर असली सनातन को सत्ता में बैठाएंगे। असली नकली सन्तो सनातनियों की बात सामने आई है। नकली संत व सनातनी सत्ता में बैठे लोगों को और असली संत व सनातनी,शंकराचार्य के साथ खड़े लोगों को कहा जा रहा है।
सत्ता पक्ष के जिम्मेदार लोगों में नही रेंग रही
सनातनी जूँ- अभी तक सत्ता पक्ष का कोई भी व्यक्ति मौके पर पहुंचकर पटाक्षेप कराने की पहल नही की है। यह खबर जरूर है कि लोग इस्तीफा देने लगे हैं और उसका कारण इस घटना से जोड़कर बताया जा रहा है। बरेली में एक सिटी मजिस्ट्रेट ने अपने पद व नौकरी से इस्तीफा दे दिया है तो वहीं लखनऊ मंडल में कुछ भाजपाइयों ने भी संगठन का दायित्व छोड़ा है। एक ओर जहां विपक्ष शंकराचार्य जी के समर्थन में पंडाल तक पहुंच रहा है तो वहीं सत्ता पक्ष के लोगों पर इसका कोई असर नही दिख रहा है। उनके कान में अभी तक सनातनी जूं तक नही रेंगी और न ही मान मनौव्वल करने पहुंचे। इस बात को लेकर अच्छे खासे लोग नाराज दिखाई दिए।
उग्र आंदोलन की है तैयारी -
लखनऊ,बरेली,आजमगढ़,अमेठी,गुजरात,छत्तीसगढ़, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान से पहुंचे लोगो ने कहा कि इसका असर व्यापक होगा। यदि शंकराचार्य जी से सरकार माफी नही मांगती है और उन्हें स्नान नही कराती है तो इसका असर अगले चुनाव में दिखेगा । आगे यह भी कहा गया कि आंदोलन की रूपरेखा बनाई जा रही है जगह जगह पर आंदोलन होंगे और दिल्ली का घेराव किया जाएगा ।
गो माता को राष्ट्र माता बनाने को लेकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा जिसमें घर घर जाकर जन जन को जोड़ने की रूपरेखा बनाई गई है।
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