: यह कुम्भ होगा ऐतिहासिक सजेगी परमधर्म संसद यहां होगा 324 कुंडीय महायज्ञ
Sat, Jan 4, 2025
प्रयागराज-
भारत से भारत को जोड़ने और भारत की संस्कृति को समझने का पर्व ही कुंभ है ।
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जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज का गौ प्रेम[/caption]
ज्योतिर्मठ के शंक़राचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का कुंभ में मंगलप्रवेश 9 जनवरी को ।
हर 6 वर्ष में अर्धकुंभ, 12 वर्ष में कुंभ और 12 कुंभ बीतने के उपरांत 144 वर्षों में महाकुंभ का पर्व होता है, जो इस सदी में हमें दर्शन और स्नान हेतु प्राप्त हुआ है । अर्थात् वर्तमान समय संपूर्ण विश्व के सनातनी, वैदिक, हिन्दू धर्म के लिए सौभाग्य है ।
इस कुंभ महापर्व से मानवता और विश्व कल्याण की कामना करने वाले परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिषपीठाधीश्वर बद्रिकाश्रम हिमालय जगदगुरु शंकराचार्य स्वामीश्री अविमुक्तेश्वरानंद : सरस्वती 1008, कुंभ में मंगलम् प्रवेश दिनांक 9 जनवरी 2025 को करेगे। शंकराचार्य इस परम् पवित्र महापर्व को विशिष्ठता प्रदान करने हेतु ही परम् धर्म संसद का आयोजन कर रहे है जो 27 दिन तक चलेगी इस धर्म संसद में नीतिगत-धर्मगत-राष्ट्रगत निर्णय के उपरांत प्रतिदिन धर्मादेश जारी किया जाएगा । यह धर्मादेश भारत में धर्म और राष्ट्र के सबलता का आधार बनेगा ।
धर्म संसद के 27 विषय निर्धारित है, जिनपर प्रतिदिन चर्चा होगी ।तात्कालिक परिस्थितियों को देखते हुए अन्य महत्वपूर्ण विषय भी चर्चा में समाहित किये जा सकेगे ।धर्म संसद का आरंभ दिनांक 10 एवं 11 जनवरी को गो संसद के रूप में होगा तदुपरांत धर्म संसद में अन्य 26 विषय समाहित होगे, धर्म संसद निरंतर 11 फ़रवरी 2025 तक चलेगी।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी द्वारा गो माता की रक्षा हो और हिंदुओ का कल्याण हो इस हेतु कुंभ में पहली बार 324 कुंडीय महायज्ञ का आयोजन भी किया जा रहा है । 1100 विद्वान् पुरोहितों द्वारा यह अद्भुत महायज्ञ संपन्न होना है ।ज्ञात हो कि भारत में मूल नस्ल की देशी गो माता (रामा गाय) पर आज संकट है इस गो प्रधान देश में मात्र 53 नस्ल की ही गो माता आज शेष है, संपूर्ण राष्ट्र की जनता उन गो माता के दर्शन का लाभ पूज्यश्री शंक़राचार्य जी के कुंभ प्रयाग शिविर में कर सकेगे जिसकी व्यवस्था की जा रही है ।परम धर्म संसद का हो
धर्मसंसद् 1008 की संरचना को भव्यता प्रदान करते हुए उसके स्वरूप का निर्धारण किया गया है, जिसके अनुसार 543 संसदीय क्षेत्रों से गो प्रतिनिधि(गो संसद), 170 सन्त-विद्वान्, 99 देशों से धर्मप्रतिनिधि, 8 परमधर्मांसद, 8 अन्यधर्मांसद, 108 धर्माचार्य/संस्थाप्रतिनिधि, (4) शंकराचार्य या उनके पीठों के प्रतिनिधि, 4 धामों के प्रतिनिधि, 7 धर्मपुरियों के प्रतिनिधि, 12 ज्योतिर्लिंगों के प्रतिनिधि, 13 अखाडों के प्रतिनिधि, 51 शक्तिपीठों के प्रतिनिधि, 5 वैष्णवाचार्यों के प्रतिनिधि, 12 धर्मसंस्थाओं के प्रतिनिधि), 36 धर्मसेवाप्रमुख/प्रभारी/सुयोजक, 36 राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि शामलित होगा इस प्रकार कुल 1008 आसनों की संख्या से सुसज्जित होगी धर्म संसद।जैसे माला में सुमेरु सबसे ऊपर शोभायमान होता है पर गिना नहीं जाता। उसी तरह इस धर्मसंसद् 1008 में प. परमधर्माधीश ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंक़राचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती 1008, शोभायमान होंगे।
पूज्य शंकराचार्य जी की कुंभ प्रवेश मंगलम यात्रा दिनांक 9 जनवरी 2025 को पथरचट्टी रामलीला मैदान से घंटाघर चौराहे से मुट्ठीगंज बड़ा चौराहा होते हुए कुंभ की पावन पवित्र धरा, गंगा तट पर निर्मित श्री ज्योतिषपीठ शंकराचार्य शिविर मोरी मार्ग सेक्टर 19 तक निकलेगी ।
सनातन धर्म की रक्षा हेतु कई आंदोलनों में रही भूमिका-
गंगा माता की पवित्रता को बचाने रीवर-सीवर को अलग करने, गंगा को राष्ट्र नदी घोषित करने का सार्थक यत्न, रामसेतु के संरक्षण के लिए आंदोलन, राम जन्मभूमि की मुक्ति हेतु आंदोलन-मुक़दमे में गवाही और विधि विपरीत प्राण प्रतिष्ठा हेतु मुखरता, काशी में प्रचीन मन्दिरो के विध्वंस के विरोध हेतु सदैव ही निस्पक्षता और प्रखरता से डटे रहने वाले जिन्होंने नंगे पॉव गोवर्धन गिरिराज जी की प्रदीक्षणा कर दिल्ली संसद भवन तक की यात्रा की, भारत के सभी राज्यो में गो ध्वज स्थापना करते हुए संपूर्ण देश की प्रदीक्षणा करने वाले पूज्यश्री शंक़राचार्य जी की प्रवेश शोभायात्रा की भव्यता और दर्शन हेतु समस्त सनातन, वैदिक, हिन्दू सादर आमंत्रित है ।
गो हत्या बन्द करने का लिया जाएगा संकल्प-
प्रेस वार्ता कर उक्त जानकारी शंकराचार्य जी के विशेष प्रतिनिधि व कुम्भ मेला प्रभारी ब्रह्मचार मुकुंदानंद जी और परम धर्म संसद के सचिव देवेंद्र पांडेय ने बताई । उन्होंने कहा कि पूज्यश्री के प्रयाग कुंभ शिविर में मात्र उन्हें ही प्रवेश होगा जिन्होंने गो हत्या बंद करने के संकल्प स्वरूप गो मतदाता की शपथ ली होगी/शपथ लेंगे।
: तीर्थराज प्रयाग के भव्य कुम्भ में मनकामेश्वर महादेव का होगा दिव्य दर्शन
Mon, Dec 30, 2024
प्रयागराज
- तीन नदियों का संगम कहें या सनातन संस्कृति के मिलन का अद्भुत योग दोनों का पर्याय प्रयागराज ही है। बारह वर्षों बाद प्रयागराज में कुम्भ का मेला लग रहा है। यह कुम्भ कई मायनों में महत्वपूर्ण है। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का दौरा आये दिन प्रयागराज में होना इस बात का प्रमाण है कि यह अद्भुत कुम्भ सनातन संस्कृति का मिजाज व राजनीति की एक नई दिशा का नेतृत्व करेगा।
सीएम योगी के महत्वाकांक्षी कुम्भ पर सनातनियों के आस्था का बल और अधिक गौरव प्रदान करता है। इस बार 2025 का कुम्भ और ज्यादा महत्वपूर्ण है। प्रयागराज पूरे विश्व की निगाहों पर केंद्रित रहेगा। संगम तट पर आस्था की डुबकी लगाई जाएगी। चारों पीठ के पूज्य शंकराचार्य इकट्ठे होंगे। परमधर्म संसद सजेगी और गो संसद भी । प्रयागराज से उठ रही गो माता राष्ट्र माता की गूंज इस बार वैश्विक स्तर पर सुनाई देगी।
सन्तो,महंतों,नागा साधुओं और देश देशांतर के विविध रूपों का दर्शन प्रयागराज में होने जा रहा है। यहां
अति प्राचीन पीठ श्री मनकामेश्वर महादेव मन्दिर जो कि भगवान भोलेनाथ का साक्षात आभास कराता है। कहा जाता है कि प्रयागराज में आने वाले जो श्रद्धालु संगम स्नान के पहले मनकामेश्वर महादेव का दर्शन करते हैं उनकी मनचाही इच्छा जरूर पूरी होती है ऐसी मान्यता है। इस लिए यहां देश के हर कोने से सनातनी पहुंचते हैं। यह यमुना नदी के नए पुल के समीप यमुना तट पर स्थित है।
इतिहासकार बताते हैं कि इलाहाबाद अकबर के किले से जोधा यहां आकर दर्शन करती थी । जोधा का यह हिन्दू संस्कार था उनकी मान्यता यहां सरोपरि रही है। और इसी तरह बंधवा के लेटे हुए हनुमान मंदिर का दर्शन अद्भुत है।
सभी तीर्थों का राजा है प्रयागराज। इसीलिए इसे तीर्थराजप्रयाग कहते हैं। संकल्प,तप,साधना का संगम है प्रयागराज। दो नदी गंगा,यमुना के साथ ही संतों विद्वानों के सरस्वती रूपी ज्ञान का संगम कराता है तीर्थराज प्रयाग।माघ मास में मास परायण करने का कल्पवास करने का पौराणिक महत्व है। संगम तट पर गंगा तट पर साधु संत, कल्पवासी घास फूस की कुटिया बनाकर,टेंट लगाकर साधना हेतु कड़ाके की ठंड में सुबह स्नान दान करके अपने जीवन के लौकिक व पारलौकिक पुण्य को अर्जित करते हैं। महाकुम्भ सनातन संस्कृति व परम्परा के कई रंगों का मिलन है,आस्था व संस्कार एवं पुरातन संस्कृति की विरासत है। प्रयागराज अब सज चुका है।
: बिना गो प्रतिष्ठा हिन्दू राष्ट्र की परिकल्पना अधूरी
Sat, Nov 9, 2024
प्रयागराज-
"गावो विश्वस्य मातरः" के सूत्र को ध्यान में रखते हुए गो माता को राष्ट्र माता बनाने के लिए इन दिनों ज्योतिर्मठ के वर्तमान पूज्य शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने "गो माता राष्ट्र माता" महाभियान का शंखनाद किया है।
आज
दोपहर
12 बजे से 2 बजे तक होगी बैठक
आज गोपाष्टमी तिथि के पुनीत पर्व पर वाराणसी में केदारघाट स्थित श्री विद्या मठ में 36 राज्यों के गौ प्रमुखों की बैठक आहूत की गई है। इस बैठक में प्रमुख रूप से ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वयं उपस्थित रहेंगे। दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक प्रमुख विन्दुओ पर चर्चा होगी और रणनीति बनाई जाएगी। इस बैठक में सभी राज्यों के गौ सांसद राज्य प्रभारियों की उपस्थिति होनी है। भारत यात्रा के प्रभारी ब्रह्मचारी मुकुंदानंद जी,महासचिव देवेंद्र पांडेय समेत कई गणमान्य संगठन प्रमुख भी शामिल हो रहे हैं। यह बैठक आगामी कार्ययोजना की रणनीति के लिए है। जिलेवार गो ध्वज स्थापना करने और सनातनियों को एकजुट करने की रणनीति पर मंथन होनी है। माँ गंगा के पावन तट पर बसे श्री विद्या मठ से कई महत्वपूर्ण फैसले हिन्दुओ के मंदिरों की रक्षा व गंगा बचाओ आंदोलन के लिए जा चुके हैं, जिसका सार्थक परिणाम सामने है। अब सनातन की मूल कही जाने वाली गाय माता को राष्ट्र माता बनाने का अभियान युद्ध स्तर पर इसी मठ से संचालित है,जिसका परिणाम भी विजय गाथा लिख सकेगा। क्योंकि पूर्व की सफलता व परिणाम पर ही वर्तमान व भविष्य की कल्पना की जाती है।
गो प्रतिष्ठा को लेकर पूरे भारत की कर चुके हैं यात्रा-
बता दें कि, गो माता को राष्ट्र माता की प्रतिष्ठा दिलाने के लिए पूरे भारत की यात्रा ज्योतिष्पीठाधीश्वर ने कर लिया है। हर राज्य की राजधानी में गो प्रतिष्ठा ध्वज की स्थापना करके हिन्दू समाज को इस महाअभियान में जोड़ने का कार्य किया गया है। इससे पूर्व गो संसद का आयोजन प्रयागराज व दिल्ली में किया जा चुका है। अब पूरे भारत में गाय को राष्ट्र माता बनाने का माहौल बना हुआ है।
पहले शंकराचार्य जिन्होंने गो प्रतिष्ठा हेतु किए भारत यात्रा-
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक मात्र ऐसे शंकराचार्य हैं जिन्होंने हिन्दू धर्म की आत्मा व मूल कही जाने वाली गौ माता की प्रतिष्ठा व संवर्धन को लेकर भारत की यात्रा की । ज्योतिष्पीठ के 55 वें आचार्य के रूप में प्रतिष्ठित शंकराचार्य ने गो संसद आयोजित कर भारत की यात्रा की है। पूरे देश में पूज्य शंकराचार्य को इसकी सराहना मिल रही है। हिन्दू मंदिरों,वेद गुरुकुल, गाय, गंगा ,गायत्री और सनातनी परंपरा के प्रखर पक्षधर हैं ज्योतिष्पीठाधीश्वर । खुलकर इन मुद्दों पर यदि कोई बात करता है तो शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज, यह सकल विश्व जानता है। इनकी लोकप्रियता भी सत्य व शास्त्र सम्मत बोलने की है।
पीएम मोदी का सांकेतिक समर्थन,बिना गो माता हिन्दू राष्ट्र की बात करना बेमानी -
कुछ दिनों पूर्व भारत के प्रधानमंत्री का अपने निवास में गौ माता को गले लगाकर फ़ोटो वायरल हुआ था। लोगों का कहना है कि यह निश्चित रूप से पूज्य शंकराचार्य के गो प्रतिष्ठा आन्दोलन का ही सकारात्मक परिणाम है,जिसका सांकेतिक समर्थन पीएम मोदी ने किया है। अब हर जगह गाय की चर्चा हो रही है। हिन्दू राष्ट्र की परिकल्पना भी बिना गाय के प्रतिष्ठा अधूरी है। जो लोग भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की बात कह रहे हैं उन्हें पहले गौ माता को राष्ट्र माता बनाने की पहल करनी पड़ेगी। जब भारत की माता गो माता को राष्ट्र माता का सम्मान मिलेगा तो निश्चित रूप से भारत देश भी हिन्दू राष्ट्र बन सकेगा। बिना इसके हिन्दू राष्ट्र की कल्पना करना कोरी साबित होगी।
देश भर के हिन्दू संतों को होना होगा एकजुट,बनाना होगा माहौल -
सनातन धर्म में गाय को वेद माता व वेद लक्षणा कहकर पूजा गया है। सभी प्रमुख अवतारों का कारण ही गो माता हैं।भगवान राम,भगवान कृष्ण के साथ ही सभी महापुरुषों ने गाय की पूजा व रक्षा को मूल बताया है। जो भी संत मंचों पर कथा भागवत कहते हैं उन्हें गो माता को राष्ट्र माता घोषित करने का समर्थन मंचों से करना होगा तभी सार्थक परिणाम सामने आएगा। यदि संतों के मंचों से इस बात की उद्घोषणा होगी तो सभी सनातनी एकजुट होकर माहौल बनाएंगे। बद्रिकाश्रम के शंकराचार्य ने जो लोककल्याण का बिगुल फूंका है उसका स्वागत देश भर के सभी सनातनी संतों व लोगों को शिरोधार्य कर एकजुट होना पड़ेगा। सत्ता भी तभी कोई कानून पारित करती है जब उसका एकजुटता से माहौल बनता है। शायद,इसी की प्रतीक्षा केंद्र सरकार भी कर रही है। हिंदुओं को जगाने का कार्य जगद्गुरू शंकराचार्य कर रहे हैं अब संतों व सनातनियों को भी एकजुट होकर अपने मूल की रक्षा करनी होगी।