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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के बने द्वय उत्तराधिकारी,एक ज्योतिषपीठ तथा दूसरे द्वारिका शारदा पीठ की संभालेंगे जिम्मेदारी

सनातन परंपरा के बनाये गए द्वय नए उत्तराधिकारी 

 प्रमुख विंदु- News Hilights

ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ के प्रमुख होंगे- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी

द्वारका शारदा पीठ के प्रमुख होंगे- स्वामी सदानंद सरस्वती जी

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का जन्म उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के ब्राह्मणपुर गांव में हुआ था

उनका असली नाम श्री उमाशंकर मिश्र . ब्रह्मचर्य दीक्षा ग्रहण करने के बाद नाम पड़ा, ब्रह्मचारी आनंद स्वरूप.

फिर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी से दंडी दीक्षा प्राप्त की और दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के नाम से जाने,जाने लगे

स्वामी सदानंद जी का ताल्लुक मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर से है.

उनका माता-पिता का दिया नाम रमेश अवस्थी था. ब्रह्मचर्य की दीक्षा ग्रहण करने के बाद उन्हें ब्रह्मचारी सदानंद कहा जाने लगा.

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के समीप बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद व स्वामी सदानंद तथा अन्य भक्तजन(फ़ाइल फ़ोटो)

 शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने 99 वर्ष की अवस्था मे रविवार को मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर के झोलेश्वर स्थित परमहंसी गंगा आश्रम में लंबी बीमारी के चलते आखिरी सांस ली। अभी कुछ दिन पूर्व ही उनका प्राकट्य दिवस भी मनाया गया था। स्वामी का जन्म 1924 में 2 सितंबर को हुआ था। निधम 11 सितंबर रविवार को हुआ तथा पार्थिव देह को सोमवार सायं 5 बजे समाधि दी गई। इस दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह सहित राज्य के मंत्रीगण तथा पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ,पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी मौजूद रहे। शंकराचार्य के निधन पर शोक सन्तिप्त रहे दिग्विजय सिंह ने कहा कि स्वामी जी का निधन मेरी व्यक्तिगत क्षति है।

शंकराचार्य के पार्थिव देह के समक्ष चुने गए उत्तराधिकारी- 

शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद समाधि के पूर्व ही उनके उत्तराधिकारीयों का चयन किया गया। जिनमे उनके शिष्यों स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ और स्वामी सदानंद को द्वारिका शारदा पीठ का प्रमुख बनाया गया.इनके नामों की घोषणा स्वामी स्वरूपानंद के पार्थिव देह के समक्ष ही की गई।

सनातन परंपरा बढ़ाने की चुनौती

आश्रम के लोगों का कहना है कि स्वरूपानंद सरस्वती ने अपने उत्तराधिकारियों का चयन पहले ही कर लिया था जैसीकि संतों की परंपरा रही है. लेकिन उसकी घोषणा बाद में संत अखाड़ा और पीठों के शंकराचार्य मिल बैठकर चर्चा के बाद की जाती हैं.

श्री ब्रह्म शक्ति गायत्री सिध्द पीठ, उज्जैन के पीठाधीश्वर आचार्य बुध्दिप्रकाश शास्त्री ने बताया, “नये शंकराचार्य सनातन धर्म की परंपरा को गौरवशाली तरीक़े से आगे बढ़ायेंगे.”

उन्होंने विश्वास प्रकट किया कि आने वाले समय में सनातन धर्म के प्रति धर्म प्रेमी नागरिकों में धार्मिक गतिविधियों का प्रचार-प्रसार बढ़ेगा.

अविमुक्तेश्वरानंद काफ़ी समय तक वाराणसी में रहे. वह श्री विद्या मठ के साथ ही ज्योतिर्मठ बद्रिकाश्रम की ज़िम्मेदारी पहले से ही संभालते आ रहे हैं.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवादित मुद्दों पर बोलने के लिए भी जाने जाते है. उन्हें साईं बाबा के ख़िलाफ़ बताया जाता है. उन्हें हिंदूओं के मंदिर में साईं की मूर्ति रखना नापसंद है.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इस साल छिंदवाड़ा के एक मंदिर में गए तो वो साईं की मूर्ति देखकर नाराज़ हो गये थे. उन्होंने अपने शिष्यों से भी पूछा कि आख़िर राम-कृष्ण के मंदिर में साईं का क्या काम है. उन्होंने यह भी कहा कि वो आगे से उस मंदिर में नहीं जाएंगे.

 स्वामी सदानन्द को द्वारिका शारदापीठ की जिम्मेदारी-

स्वामी सदानन्द सरस्वती

वहीं स्वामी सदानंद सरस्वती को स्वरूपानंद सरस्वती ने द्वारका शारदा पीठ की ज़िम्मेदारी पहले ही सौंपी थी. स्वामी सुबुधानंद सरस्वती स्वरूपानंद के सबसे क़रीबी रहे और अपना अधिकांश समय उनके साथ ही गुज़ारा. उनका सारा काम भी वही देखते रहे हैं.

स्वामी सदानंद सरस्वती नरसिंहपुर मध्य प्रदेश से ही ताल्लुक़ रखते हैं. 18 साल की उम्र में ही वो शंकराचार्य के साथ हो गए थे.

जब उन्होंने ब्रह्मचर्य की दीक्षा ग्रहण की तो वो ब्रह्मचारी सदानंद के नाम से जाने जाने लगे. अभी तक वो गुजरात के द्वारका शारदा पीठ में शंकराचार्य के प्रतिनिधि के तौर पर वहां का सारा काम देखते रहे हैं.

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