छत्तीसगढ़रायपुर

एक लाख करोड़ के अनचाहे कर्ज़ में दबी 3 करोड़ जनता की वैकल्पिक मुक्ति की राह बनेगी छत्तीसगढ़ स्वाभिमान यात्रा!प्रदेश की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत का हुआ शंखनाद.

सत्ताधीशों के प्रपंच से छत्तीसगढ़ महतारी का सीना छलनी,अब सदानीरा के साथ ही पेड़,पौधे,पशु,पक्षी और परमेश्वर तक वैकल्पिक राजनीति के हुए पक्षधर! प्रदेश की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है छत्तीसगढ़ स्वाभिमान यात्रा

छत्तीसगढ़ बचाना है तो स्वाभिमान यात्रा में शामिल हो छत्तीसगढ़ महतारी के साथ चलें- छतीसगढ़ स्वाभिमान यात्रा

दंडकारण्य जहां भगवान राम अपना सफल वनवास व्यतीत किये,आदिवासियों की नगरी में अब स्वाभिमान यात्रा.वैकल्पिक राजनीति का शंखनाद..

यह सिर्फ़ एक सरकार से नाख़ुश होने का मसला नहीं है यह एक पार्टी से घृणा का मसला नहीं है,जिस नंगे आदमी को लजाधुर साबित करने में उघड़ती जा रही है तुम्हारी भाषा यह उसका भी मसला नही है.मसला है छत्तीसगढ़ के 3 करोड़ से ज्यादा लोगों के स्वाभिमान का.और इसी स्वाभिमान को जगाने व रक्षा करने के लिए स्वाभिमान यात्रा की अलख जगाई गयी है। जिसमे स्वाभिमान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं सहित भाजपा के धुरंधर आदिवासी नेता नंदकुमार साय उपस्थित रहे.

रायपुर में प्रेस कांफ्रेंस कर स्वाभिमान यात्रा की जानकारी,रूपरेखा व इसकी जरूरत क्यों है,इसको साझा किया गया.साझेदारी भी दिखी राज्य के दो ऐसे राजनीतिक दिग्गजों की,जो अजेय किला भेदने की क्षमता रखते हैं. इसकी चर्चा भी राजनीतिक गलियारे में जोरों पर है।

छत्तीसगढ़ में स्वाभिमान यात्रा के मायने क्या- 

राज्य अब 22 वर्ष का अल्हड़ नौजवान हो चुका है.नौजवानी में जोश,ऊर्जा,सपने देखने की व उड़ान भरने की आतुरता, सब कुछ बदल डालने की सुंदर ताकत व अल्हड़ मस्ती होती है.लेकिन दुख इस बात का है कि छत्तीसगढ़ की सूरत मुरझाई हुई है,क्योंकि यहाँ की ऊर्जा,यहाँ की सुंदरता और यहां की शान में भ्र्ष्टाचार,बेरोजगारी,अनैतिकता,लूटपाट,व्यभिचार,ठगी और शराबी समाज की बू शामिल हो गयी है। एक समय दण्डकारण्य की महिमा भगवान राम के लिए वरदान साबित हुई थी,लेकिन आज उसी दण्डकारण्य में भोले भाले आदिवासी जो अपनी निष्ठा व सहजता से प्रकृति की रक्षा किया करते थे,आज वे शोषित के साथ साथ ठगे भी जा रहे हैं। किसान जो यहाँ की शोभा हैं,धान का कटोरा कहे जाने वाली उपलब्धि में उन्ही का योगदान है,आज वे ठगे गए हैं। मजदूर जो यहां की ताकत हैं,उनके हाथ खाली हैं,युवा जो भविष्य गढ़ने में हुनर लेकर अपने हाथों की लकीरों को आज कोस रहे हैं उनके चेहरे पर बेरोजगारी की मायूसी है? सुरसा की तरह भरस्टाचार , महगाई मुंह पसारे खड़ी है जिसमें सभी समा रहे हैं.सपने व जीवन की गति चकनाचूर हो रही है.कमर्चारियों की हालत असमंजस में है,हड़ताल कर उनको यह जताना पड़ता है कि उनके भी परिवार हैं और उन्हें भी भूख लगती है.उन्हें भी बढ़ा हुआ मंहगाई भत्ता चाहिए इसके लिए आंदोलन करना उनकी मजबूरी है। और जो देश या राज्य मजबूरी में होकर चलना शुरू करता है, उसका भविष्य बिना स्वाभिमान के और बिना सुरक्षा के हो जाता है। कमोवेश,यही स्थिति छत्तीसगढ़ व छत्तीसगढ़ियों की हो गई है. इसलिए छत्तीसगढ़ के स्वाभिमान के रक्षार्थ व राजनीतिक बदलाव का शंखनाद किया गया है। जिसमे राजनीतिक सामाजिक समरसता के कट्टर जनसंचेतक वीरेंद्र पांडेय,जो कि गलत नीतियों के दंभ को तोड़ने में महारथी भी रहे हैं,सत्ता की लोलुपता से परे पूर्व वित्त आयोग के अध्यक्ष व वर्तमान में वैकल्पिक राजनीति के योगकारक कहे जाने वाले पांडेय जी आज छत्तीसगढ़ व छत्तीसगढ़ियों की आनबान शान के लिए मैदान में उतरे हैं,उनके साथ जीत का एक तमगा और तब लग जाता है जब आदिवासी बाहुल्य राज्य के अनुसूचित जनजाति के राष्ट्रीय दमदार हस्ताक्षर के रूप में भाजपा के धुरंधर लोकप्रिय नेता नंदकुमार साय का जुड़ना तय हो गया है। अब निश्चितरूप से छल प्रपंच की राजनीति की जड़ें कमजोर पड़ेंगीं जिससे आने वाला युवा भविष्य इनसे इस स्वाभिमानी यात्रा में जुड़ेगा। और जुड़ना भी चाहिए ताकि गिरवी रखी राज्य की अस्मिता,स्वतंत्र हो,विकास कर सके.समुचे प्रदेश को यदि लाख करोड़ से ज्यादा हो चुके कर्ज से उबरना है तो हमें लगता है,सत्ता का बदलाव करना जरूरी होगा.यही यात्रा जन जन की स्वाभिमानी जुड़ाव की यात्रा बनेगी,जिसमें लोगों का जनकारवाँ मन के साथ जुड़ता चलेगा.

क्या कहते हैं छत्तीसगढ़ के स्वाभिमानी सजग प्रहरी-नंदकुमार साय..

एकजुट होकर लड़नी होगी स्वाभिमान की लड़ाई,तभी बचेगा हम छत्तीसगढ़ियों व छत्तीसगढ़ महतारी का सम्मान

आदिवासी राष्ट्रीय नेता नंदकुमार साय(फ़ोटो)

छत्तीसगढ़ में आर्थिक, राजनीतिक व्यवस्थागत परिवर्तन को लक्ष्य बनाकर वरिष्ठ आदिवासी नेता नंदकुमार साय के नेतृत्व में और छत्तीसगढ़ के जाने-माने कट्टर वैचारिक राजनीतिज्ञ वीरेंद्र पांडेय के मार्गदर्शन में “स्वाभिमान यात्रा– छत्तीसगढ़” का आयोजन किया जा रहा है। इस संदर्भ में नंदकुमार साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के गठन के दशकों बीत जाने के बाद आज छत्तीसगढ़ के स्वाभिमान की रक्षा करने की आवश्यकता आन पड़ी है। छत्तीसगढ़ कर्ज में डूबता जा रहा है। रमन सिंह के शासनकाल में लगभग 42000 करोड रुपए का कुल कर्ज था, जो अब बढ़कर एक लाख तीन हजार करोड़ रुपए के लगभग हो चुका है। कर्ज में डूबा प्रदेश और कर्ज में डूबी जनता कभी स्वाभिमान से सर नहीं उठा सकती है। भाजपा और कांग्रेस की ओछी राजनीति और नेतृत्व विहीन परिस्थितियों के कारण छत्तीसगढ़ में समाज के सज्जन, ईमानदार और चरित्रवान कार्यकर्ताओं और नेतृत्वकर्ताओं के साथ छत्तीसगढ़ के स्वाभिमान की रक्षा करने, छत्तीसगढ़ को सोने की चिड़िया बनाने के उद्देश्य से आमूलचूल परिवर्तन करने का लक्ष्य लेकर स्वाभिमान यात्रा– छत्तीसगढ़ का आयोजन निश्चित किया गया है। इस यात्रा में छत्तीसगढ़ के लोगों को सम्मानजनक जिंदगी और इज्जत की रोटी की व्यवस्था पर बात होगी। विकास के नाम पर प्रकृति के विनाश को पूरी तरह रोकने के लिए जंगलों की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता है। शुद्ध पेयजल के लिए छत्तीसगढ़ की नदियों को शुद्ध और सदानीरा बनाने के लिए यह स्वाभिमान यात्रा है। यह यात्रा छत्तीसगढ़ की व्यवस्था परिवर्तन की यात्रा है। पत्रकार वार्ता के माध्यम से इस बात की सार्वजनिक घोषणा आज की जा रही है।

सत्ताधारी,सत्ता पाकर किये गए वादों से मुकर गए?-वीरेंद्र पांडेय

पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए पूर्व वित्त आयोग अध्यक्ष वीरेंद्र पांडेय (फ़ोटो)

छत्तीसगढ़ वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र पांडेय ने पत्रकारों को बताया कि, प्रदेश कई गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। धान खरीदी के नाम पर छत्तीसगढ़ के किसानों को षडयंत्र पूर्वक ठगा जा रहा है। जो राजनीतिक दल सत्ता में आए, उन्होंने दाने दाने की खरीद का वादा किया था। लेकिन दाना दाना तो छोड़िए, उपज की सही खरीददारी भी नहीं हो पाती है। एक निश्चित समय सीमा के बाद खरीदारी भी बंद हो जाती है। इस व्यवस्था को बदल कर बारहों महीने किसानों के फसल की खरीददारी किए जाने की आवश्यकता है। चिटफंड के मामले में वर्तमान सरकार के मुखिया ने राजीव भवन में हजारों अभिकर्ता और निवेशकों के बीच यह कहा था कि सारा पैसा सरकार के बजट से दिया जाएगा। लेकिन अब सरकार और उसके मुखिया वादे से मुकर चुके हैं। रमन सिंह की सरकार और उनके अधिकारियों ने चिटफंड को बढ़ावा दिया और भूपेश बघेल की सरकार ने बजट से पैसे वापसी का झूठा वादा किया। अब न तो बजट से देने की कोई बात है और ना ही इस धनवापसी की वसूली के लिए किसी प्रकार के टैक्स लगाने की कोई बात है, जो भूपेश बघेल ने कहा था। इसी प्रकार सरकार के कार्यों में जुड़े कई प्रकार के दैनिक वेतन भोगियों को निश्चित मानदेय भी नहीं दिया जाता। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि सरकार की योजना से सरकार के काम में लगे हुए समस्त प्रकार के लोगों को एक सम्मानजनक निश्चित मानदेय का भुगतान हो। शराब पर पूर्ण प्रतिबंध के लिए कसम खाकर सत्ता में आने वाली वर्तमान कांग्रेस सरकार न तो कोई नीति बना पा रही है और न ही पूर्ण रूप से शराब प्रतिबंधित कर पा रही है। पूर्व की सरकार ने शराब की जो व्यवस्था लागू की थी वह आज दुगने– चौगुने स्तर पर छत्तीसगढ़ में चल रही है। छत्तीसगढ़ में अंधाधुंध जंगलों की कटाई का दुष्परिणाम यह हो गया है कि आज नक्सलियों से ज्यादा बड़ी समस्या छत्तीसगढ़ के हाथी, तेंदुए, भालू और बंदर हो गए हैं। लोगों को जान बचाना मुश्किल हो रहा है। हाथी घर उजाड़ रहे हैं, तेंदुए और भालू सड़कों पर घूम रहे हैं। समस्याओं की सही समझ ना होने और नीतियों के अभाव में छत्तीसगढ़ की आम जनता बुरी तरह परेशान हताश और निराश है। छत्तीसगढ़ की जनता ने कांग्रेस और भाजपा के नेतृत्व में सरकारों के कामकाज को देख और परख लिया है। आम जनता स्वयं को हताश और परेशान महसूस कर रही है। नेता व्यवसाई हो गए हैं। सत्ता के माध्यम से लूट खसोट करना और किसी भी कीमत पर खुद को बनाए रखना ही आज की राजनीति का अंतिम लक्ष्य है। इन्हीं बातों के मद्देनजर स्वाभिमान यात्रा की शुरुआत की जा रही है। हम समाज के इमानदार और चरित्रवान लोगों के साथ नए लड़ाके और नए औजार तैयार करेंगे।

छत्तीसगढ़ में विश्वसनीय नेतृत्व का पड़ा अकाल,इसलिए अब स्वाभिमानी नेतृत्व की आन पड़ी है आवश्यकता-नरेंद्र कुमार शर्मा

भाटापारा के पूर्व विधायक नरेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ के स्थापित राजनीतिक दलों में कोई विश्वसनीय नेतृत्वकर्ता नहीं है। लोग नेताओं की बात पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। इसलिए समाज के इमानदार, सज्जन और चरित्रवान लोगों के साथ प्रकृति पूजक आदिवासी नेतृत्वकर्ता के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की धरती को बचाने, बनाने और सवारने के लिए स्वाभिमान यात्रा का सभी छत्तीसगढ़ वासियों को सहयोग करना चाहिए।

सदानीरा को भी छलने की कोई कसर नही छोड़ा सत्ताधारियों ने,परिवर्तन आवश्यक है-पूरन छाबरिया

पेंड्रा गौरेला के पूरन छाबरिया ने कहा कि जिस बेदर्दी से हसदेव के जंगलों को काटा जा रहा है, अरपा और हसदेव जैसी नदियों में राख और गंदगी से जमीन पाटकर नदियों को ही समाप्त किया जा रहा है। भीषण गंदगी नदी में ही बहाई जा रहा है यह पूरी मानवता और जीव जगत के लिए खतरा है। अगर समाज की सज्जन शक्ति इकट्ठे एक मंच पर नहीं आएगी तो छत्तीसगढ़ और यहां के लोगों को बर्बाद होने से कोई नहीं बचा सकता। छाबरिया का कहना है कि यदि हम चाहें तो केवल छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक वनस्पति, खेती और वन औषधि से ही छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को कई गुना ज्यादा बढ़ा सकते हैं। हर व्यक्ति को रोजगार दे सकते हैं। छत्तीसगढ़ को कर्ज मुक्त कर सकते हैं।

छत्तीसगढ़ को सोने की चिड़िया बनाने ग्रामीण छत्तीसगढ़ियों को आना होगा आगे,पंचायत स्तर पर आर्थिक स्वायत्तता की है जरूरत-अधिवक्ता सतीश त्रिपाठी

वार्ता को संबोधित करते हुए उच्च न्यायालय के अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता सतीश कुमार त्रिपाठी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की ग्राम पंचायतों को तीसरी सरकार के रूप में आर्थिक स्वायत्तता दिए जाने की आवश्यकता है। ग्राम पंचायतों को ग्राम सभाओं के माध्यम से उसी प्रकार आर्थिक व्यवस्थाएं मिलनी चाहिए जैसी देश की संसद और विधानसभाओं को है। केंद्र और राज्य सरकार के बजट का एक निश्चित हिस्सा ग्राम पंचायतों को मिलना चाहिए। जिससे गांव के लोग अपने अनुसार अपनी हर व्यवस्था कर सकें। उन्हें राज्य और देश की राजधानी की तरफ मुंह न तकना पड़े। यदि सज्जन शक्तियों का एकत्रीकरण हुआ और सही व्यवस्थाएं बनी तो छत्तीसगढ़ सोने की चिड़िया बन जाएगा।

दीपावली के बाद निकाली जाएगी स्वाभिमान यात्रा-

पत्रकार वार्ता में यह घोषणा की गई कि दीपावली के ठीक पश्चात पेंड्रा रोड, अमरकंटक से “स्वाभिमान यात्रा छत्तीसगढ़” का रथ हजारों लोगों की मौजूदगी में निकाला जाएगा जो कि छत्तीसगढ़ के हर जिले, कस्बे तक नंदकुमार साय और वीरेंद्र पांडेय सहित यात्रा संचालन समिति के सदस्यों के साथ पहुंचेगा। पत्र वार्ता के दौरान डौंडीलोहारा क्षेत्र से रमेश चुरेंद्र, दुर्ग भिलाई से संतोष विश्वकर्मा और थनेंद्र साहू सहित रायपुर, जगदलपुर आदि जगहों के प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित थे।

Khabar Times
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